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DB l नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण और जनरल कैटेगरी को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जनरल या ओपन कैटेगरी किसी जाति या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि केवल मेरिट के आधार पर होती है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/MBC/EWS) का उम्मीदवार बिना किसी छूट या रियायत के जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में ही माना जाएगा, न कि उसकी आरक्षित श्रेणी में सीमित किया जाएगा।

यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में आया है। अगस्त 2022 में राजस्थान हाईकोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II के 2756 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। मई 2023 में परिणाम आने पर यह सामने आया कि कई आरक्षित श्रेणियों का कट-ऑफ जनरल से भी अधिक था। इसके चलते कुछ ऐसे आरक्षित उम्मीदवार, जिन्होंने जनरल कट-ऑफ पार कर लिया था, लेकिन अपनी श्रेणी का कट-ऑफ नहीं ला पाए, उन्हें अगले चरण से बाहर कर दिया गया।

इस फैसले को चुनौती देने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि पहले ओपन/जनरल मेरिट लिस्ट केवल योग्यता के आधार पर बननी चाहिए। जो उम्मीदवार उसमें आ जाएं, उन्हें आरक्षित सूची में नहीं रखा जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस निर्णय को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट प्रशासन की अपील खारिज कर दी है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने ‘डबल बेनिफिट’ की दलील को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी रियायत के चयन कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है। केवल आवेदन पत्र में आरक्षित श्रेणी का उल्लेख करना, आरक्षित पद पर नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं देता।

सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा साहनी और आर.के. सभरवाल जैसे पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ओपन कैटेगरी का अर्थ ही “सभी के लिए खुला” है। यह फैसला सरकारी भर्तियों में मेरिट को सर्वोपरि मानते हुए संवैधानिक समानता के सिद्धांत को और मजबूत करता है।

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