शर्मिष्ठा पनोली, एक 22 वर्षीय लॉ छात्रा और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर, को हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक एक सोशल मीडिया वीडियो पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
इस वीडियो में कथित रूप से धार्मिक समुदाय और पैगंबर मुहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिससे सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश फैल गया। हालांकि पनोली ने वीडियो को तुरंत हटा लिया और बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था, जिसके परिणामस्वरूप कानूनी कार्रवाई की गई।
पनोली को शनिवार को कोलकाता पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि उसने कई समन के बावजूद पेशी नहीं दी, जिसके बाद उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया
इस घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक संवेदनशीलता और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर व्यापक बहस को जन्म दिया है।
यह मामला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की सीमाओं और कानूनी दायित्वों के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है।
भाजपा ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी को “तुष्टिकरण की राजनीति” बताया। पार्टी ने कहा कि राज्य सरकार विशेष समुदाय को खुश करने के लिए एक छात्रा को निशाना बना रही है।
कंगना ने इंस्टाग्राम पर शर्मिष्ठा के समर्थन में लिखा, “अब अभिव्यक्ति की आज़ादी एक तरफा हो गई है।” उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को सच्चाई बोलने के लिए दंडित किया जा रहा है।
गीर्ट विल्डर्स ,डच सांसद, ने भी पनोली का समर्थन करते हुए ट्विटर पर लिखा:
“Don’t punish her for speaking the truth. Free the brave Sharmistha!” विल्डर्स पहले भी भाजपा नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में आ चुके हैं। उन्होंने इस मामले को फ्री स्पीच का मुद्दा बताया।
हैशटैग्स जैसे #ReleaseSharmistha और #FreeSharmisthaPanoli भारत और विदेशों में ट्रेंड कर चुके हैं।
समर्थकों का दावा है कि यह गिरफ्तारी “अभिव्यक्ति की आज़ादी” पर हमला है, वहीं विरोधियों का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना अनुचित है।
