DB l मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि रेलवे प्रशासन ने पटरियों तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए हैं, तो क्रॉसिंग करते समय हुई मौत के लिए भी रेलवे को मुआवजा देना होगा। जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए रेलवे दावा अधिकरण, भोपाल के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है।
मामला सिंगरौली निवासी राम अवतार और अन्य दो की अपील से जुड़ा है। 16 अप्रैल 2011 को राम अवतार अपने तीन वर्षीय बेटे राजेश का मुंडन कराने मैहर गए थे। वापसी के दौरान रेलवे स्टेशन पर राजेश पटरी पर चला गया। उसे बचाने के लिए दो महिलाएं — लोली बाई और इंद्रमती — भी पटरी पर आ गईं। उसी समय दूसरी लाइन से गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से तीनों की मौके पर मौत हो गई

इस घटना पर दायर दावे को रेलवे दावा अधिकरण, भोपाल ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि “मृतक ट्रेन में सवार नहीं थे, बल्कि अनधिकृत रूप से पटरियों को पार कर रहे थे।” इसलिए रेलवे मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि रेलवे प्रशासन का वैधानिक दायित्व है कि वह पटरियों तक अनधिकृत पहुंच को रोके और सुरक्षा सुनिश्चित करे। कोर्ट ने कहा कि “लापरवाही या अनधिकृत प्रवेश से रेलवे स्वतः ही जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।”
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह हादसा रेलवे की सुरक्षा में लापरवाही का परिणाम था। अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण को निर्धारित मुआवजा पीड़ित परिवार को देने के निर्देश जारी किए हैं।
इस फैसले ने रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी तय करते हुए एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैक एक्सेस नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
