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चांद पर न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की योजनाएं चल रही हैं। रूस और चीन मिलकर 2035 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर एक विशाल ‘इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन’ (ILRS) बनाने की योजना बना रहे हैं, जिसमें न्यूक्लियर पावर स्टेशन भी शामिल होगा। यह स्टेशन वैज्ञानिक अनुसंधान, कम्युनिकेशन हब और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र होगा। इस परियोजना में भारत की भी रुचि है, और वह इसमें शामिल होने की संभावना पर विचार कर रहा है।
भारत का उद्देश्य 2040 तक चांद पर मानव मिशन भेजने और एक स्थायी बेस स्थापित करने का है।
अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA भी चांद पर न्यूक्लियर पावर सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उसने 2022 में तीन कंपनियों को 5 मिलियन डॉलर के अनुबंध दिए थे ताकि वे 40 किलोवाट क्षमता वाले फिशन आधारित पावर सिस्टम के डिजाइन तैयार कर सकें। यह सिस्टम चांद की रातों के दौरान ऊर्जा आपूर्ति के लिए उपयुक्त होगा, जो लगभग 14.5 पृथ्वी दिनों तक चलती हैं। NASA का लक्ष्य 2030 के दशक के प्रारंभ में इस तकनीक का परीक्षण करना है।
इस प्रकार, चांद पर न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना की योजनाएं विभिन्न देशों द्वारा बनाई जा रही हैं, जो भविष्य में चांद पर मानव बस्तियों और अनुसंधान केंद्रों के लिए आवश्यक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
परियोजना का उद्देश्य और विशेषताएँ
• स्थल चयन: चांद का दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र चुना गया है क्योंकि यहाँ जल बर्फ और हीलियम-3 जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की संभावना है, जो दीर्घकालिक मानव उपस्थिति और ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक हैं।
• ऊर्जा आपूर्ति: चांद की रातें लगभग 14 पृथ्वी दिनों तक होती हैं, जब सूर्य की रोशनी नहीं मिलती। इस दौरान ऊर्जा आपूर्ति के लिए न्यूक्लियर पावर स्टेशन आवश्यक होगा, क्योंकि सौर ऊर्जा अपर्याप्त होगी।
• स्वचालित निर्माण: न्यूक्लियर रिएक्टर का निर्माण रोबोटिक तकनीकों के माध्यम से स्वचालित रूप से किया जाएगा, ताकि मानव उपस्थिति की आवश्यकता न हो।
• संरचनाएँ: इस स्टेशन में कमांड सेंटर, संचार हब, वैज्ञानिक अनुसंधान सुविधाएँ और न्यूक्लियर पावर स्टेशन शामिल होंगे।
भारत की संभावित भागीदारी
• रूस के रोस्कोस्मोस प्रमुख अलेक्सी लिखाचेव के अनुसार, भारत और चीन इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण में रुचि रखते हैं। भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अभी तक इस परियोजना में भागीदारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह संभावित है कि भविष्य में भारत इस अंतरराष्ट्रीय प्रयास में शामिल हो।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
• यह परियोजना रूस और चीन के बीच सहयोग का परिणाम है, जो 2021 में एक समझौते के तहत शुरू हुई थी। इसके तहत चीन चांद पर तीन मिशन—चांग’e 6, चांग’e 7, और चांग’e 8—भेजेगा, जिनका उद्देश्य आवश्यक तकनीकों का परीक्षण करना और एक रोबोटिक आधार स्थापित करना है। पहला मिशन 2026 में और परियोजना का समापन 2028 तक होने की योजना है।

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