0 0
Read Time:3 Minute, 9 Second

DB l “जिस दस्तावेज़ को देश-विदेश में पहचान माना जाता है, उसी पर उठे नागरिकता के सवाल”

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद देश में पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट विदेश यात्रा के दौरान व्यक्ति की राष्ट्रीयता और पहचान की पुष्टि करता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनों और वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट और नागरिकता दो अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के अंतर्गत आते हैं। पासपोर्ट का संचालन पासपोर्ट एक्ट 1967 के तहत होता है, जबकि नागरिकता से जुड़े मामलों का निर्धारण नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार किया जाता है।

हालांकि, इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कई नेताओं ने पूछा है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस जांच और दस्तावेज सत्यापन का क्या महत्व है। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट केवल तभी जारी किया जाता है जब सरकार यह सुनिश्चित कर ले कि आवेदक पात्र है। लेकिन यदि किसी मामले में नागरिकता को लेकर विवाद या कानूनी चुनौती उत्पन्न होती है, तो पासपोर्ट अकेले अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाण पत्र, पारिवारिक रिकॉर्ड, नागरिकता प्रमाण पत्र और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

“पासपोर्ट पहचान का मजबूत आधार है, लेकिन कानून की नजर में नागरिकता का आखिरी फैसला अन्य वैधानिक साक्ष्यों से तय होता है।”

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *