DB l झारखंड की राजधानी रांची से एटीएस और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की संयुक्त कार्रवाई में ISIS से जुड़ा संदिग्ध आतंकी अशहर दानिश गिरफ्तार किया गया है। दानिश की गिरफ्तारी ने भारत में सक्रिय पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल की साजिश को उजागर कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि दानिश भारत में ISIS नेटवर्क का प्रमुख समन्वयक था, जिसे उसके साथी कोड नेम ‘CEO’ से पुकारते थे।
जानकारी के अनुसार, दानिश झारखंड के बोकारो जिले के पेटरवार ब्लॉक का रहने वाला है और लंबे समय से ISIS के लिए काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बताया कि दानिश पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर से लगातार संपर्क में था और संगठन की जड़ें छोटे शहरों और टियर-2 इलाकों तक फैलाने की कोशिश कर रहा था। उसके खिलाफ दिल्ली में दर्ज एक पुराने आतंकी मामले में भी तलाश जारी थी।

संयुक्त टीम ने रांची के लोअर बाजार थाना क्षेत्र के इस्लामनगर स्थित तबारक लॉज पर सोमवार देर रात छापा मारा और दानिश को गिरफ्तार किया। उसके पास से संदिग्ध रसायन, कई अहम दस्तावेज़, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं। ये सभी सामान अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन डिजिटल सबूतों से ISIS के भारतीय नेटवर्क और विदेशी कनेक्शन से जुड़े कई राज खुल सकते हैं।
इस ऑपरेशन में सिर्फ दानिश ही नहीं, बल्कि अन्य चार संदिग्ध आतंकियों को भी पकड़ा गया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुंबई निवासी आफताब और सूफियान, तेलंगाना से मुजपा और एक अन्य संदिग्ध कामरान शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि ये सभी आतंकी संगठन के स्लीपर मॉड्यूल का हिस्सा थे, जिन्हें बम बनाने, हथियार जुटाने और संगठन की ताकत बढ़ाने जैसे काम सौंपे गए थे।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, यह मॉड्यूल पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा था और भारत में बड़े हमले की तैयारी कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि दानिश मॉड्यूल का सरगना था और खुद को ‘CEO’, ‘गजबा’ और ‘प्रोफेसर’ जैसे कोड नेम से पहचानता था। एजेंसियां पिछले छह महीने से इस पूरे मॉड्यूल की निगरानी कर रही थीं।
अधिकारियों का मानना है कि अशहर दानिश की गिरफ्तारी से ISIS के नेटवर्क और उसकी भारत में गतिविधियों को लेकर बड़े खुलासे हो सकते हैं। इससे पहले भी झारखंड से ISIS से जुड़े कई संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन दानिश की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां सबसे अहम मान रही हैं। अब पूछताछ और डिजिटल जांच से यह स्पष्ट होगा कि भारत में आतंक फैलाने की उनकी योजना किस स्तर तक पहुंच चुकी थी।
