DB l युद्ध के बाद बदले हालात, दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन पर ईरान का नियंत्रण और सख्त…
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों पर भारी ट्रांजिट शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब इस जलमार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज से औसतन 15 से 20 लाख डॉलर (1.5 से 2 मिलियन डॉलर) तक का शुल्क लिया जा रहा है।
फ़ार्स समाचार एजेंसी ने ईरानी संसद की योजना एवं बजट समिति के सदस्य मोहसेन ज़ंगनेह के हवाले से दावा किया है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए एक विशेष कार्य समूह गठित किया गया है। यह समूह ईरान के अर्थव्यवस्था एवं वित्त मंत्रालय के समन्वय से और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की निगरानी में काम कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक सभी भुगतान नकद में नहीं किए जा रहे हैं। कई जहाज कंपनियां टेथर (USDT) क्रिप्टोकरेंसी, वस्तुओं, सेवाओं और बार्टर सिस्टम के जरिए भी भुगतान कर रही हैं। प्राप्त राजस्व सीधे राष्ट्रीय खजाने में जमा किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहती है तो ईरान को इससे सालाना 7.5 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। गौरतलब है कि दुनिया भर में तेल और एलएनजी (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत सप्लाई इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है।
28 फरवरी को क्षेत्रीय युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया था। हाल ही में ईरान ने “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” नामक एक नया संगठन भी बनाया है, जो जहाजों और उनके कार्गो की जांच करेगा तथा दुश्मन देशों से जुड़े जहाजों की निगरानी करेगा।

भारत समेत कई देशों के लिए चिंता की बात यह है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि भारतीय जहाजों को भी यह शुल्क देना पड़ रहा है या नहीं। हालांकि ईरान पहले संकेत दे चुका है कि किसी भी देश को विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी है, क्योंकि यहां का हर फैसला दुनिया भर में तेल की कीमतों और व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।
