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दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD, DDA और वक्फ बोर्ड से मांगा जवाब, अगली सुनवाई 22 अप्रैल को

DB l दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित सैयद फैज इलाही मस्जिद और उससे सटी भूमि पर अतिक्रमण हटाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), शहरी विकास मंत्रालय, भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जवाब तलब किया है। मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने इन सभी विभागों को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।

File photo

यह विवाद उस समय और गंभीर हो गया, जब मंगलवार देर रात एमसीडी की टीम ने मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी कथित अवैध भूमि पर बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें पुलिस को हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस के अनुसार पथराव की घटना में पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं। एमसीडी की कार्रवाई में एक डिस्पेंसरी और एक बारात घर को ध्वस्त किया गया है।

मस्जिद प्रबंधन समिति ने एमसीडी के 22 दिसंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। समिति का कहना है कि मस्जिद से सटी यह जमीन वर्षों से मस्जिद और कब्रिस्तान के उपयोग में रही है और यह वक्फ संपत्ति है। समिति ने याचिका में आरोप लगाया है कि बिना समुचित जांच और सुनवाई के तोड़फोड़ का आदेश देना संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस जमीन से जुड़े विवाद का अधिकार क्षेत्र वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है, न कि नगर निगम के पास।

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वहीं एमसीडी का पक्ष है कि मस्जिद समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड 0.195 एकड़ जमीन के अलावा शेष भूमि के स्वामित्व से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। एमसीडी के अनुसार 1940 की डीड के तहत केवल 0.195 एकड़ जमीन ही मान्य है, जबकि उसके बाहर का निर्माण सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण है, जिसे हटाया जाना जरूरी है।

इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता भी चर्चा में है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि नवंबर में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट से पहले एक संदिग्ध आतंकी ने इसी मस्जिद में कुछ समय बिताया था, जिसके बाद इलाके में जांच और सख्ती बढ़ाई गई। फिलहाल, अदालती प्रक्रिया के बीच अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो चुकी है और अब सभी की निगाहें 22 अप्रैल को होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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