DB l 9.2 करोड़ टैक्सपेयर्स के साथ मजबूत भारत…
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने साफ संकेत दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है। गुरुवार को संसद में पेश किए गए इस सर्वे के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष 2026-27 में यह 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता उपभोग और निवेश भारत की ग्रोथ के प्रमुख आधार हैं।

सर्वे के मुताबिक निजी उपभोग व्यय और सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) में लगातार तेजी देखी जा रही है। महंगाई पर भी नियंत्रण की बात कही गई है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान औसत मुद्रास्फीति 1.7% रही, जिससे आम आदमी को राहत मिली है। टैक्स बेस के विस्तार का भी जिक्र किया गया है, जहां देश में टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़कर 9.2 करोड़ हो गई है।
हालांकि सर्वे ने आगाह किया है कि वैश्विक मोर्चे पर जोखिम बने हुए हैं। विदेशी पूंजी प्रवाह में अनिश्चितता और रुपये पर दबाव चिंता का विषय है। इसके बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।

सर्वे में राज्यों की ‘फ्रीबी पॉलिटिक्स’ पर भी सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि इससे पूंजीगत व्यय प्रभावित हो सकता है। वहीं केंद्र सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस को सराहा गया है—FY26 में कैपेक्स बढ़कर 11.21 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
