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DB l केंद्रीय कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ चुकी है। विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और NC JCM (नेशनल काउंसिल–ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा को पत्र लिखकर 8वें वेतन आयोग की शर्तों में संशोधन करने और OPS लागू करने की मांग की है। कर्मचारी संगठन 20% अंतरिम राहत का भी आग्रह कर रहे हैं, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत मिल सके।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लिए जारी टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है। उनकी सबसे प्रमुख मांग है—2004 के बाद भर्ती हुए 26 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए। संगठनों ने कहा कि NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) से कर्मचारियों की भविष्य सुरक्षा खतरे में है, जबकि OPS उनके लिए सम्मानजनक और स्थिर पेंशन सुनिश्चित करेगा।

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पत्र में कहा गया है कि 7वें वेतन आयोग में पेंशनभोगियों के लिए पेंशन संशोधन का प्रावधान था, लेकिन 8वें वेतन आयोग की ToR में पेंशन रिवीजन का उल्लेख नहीं है। कर्मचारी निकाय ने मांग की है कि इससे पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन पर आयोग स्पष्ट रूप से विचार करे। साथ ही, उन्होंने कम्यूटेशन बहाली की अवधि 15 साल से घटाकर 11 साल करने और रिटायरमेंट के 5 साल बाद 5% अतिरिक्त पेंशन देने का सुझाव दिया है।

कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग की कार्यान्वयन तिथि स्पष्ट रूप से 1 जनवरी 2026 तय करने की मांग की है। हालांकि सरकार ने आयोग को 18 महीने का समय दिया है और रिपोर्ट 2027 में आने की संभावना है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि सिफारिशें 2026 से लागू मानी जाएं और उसी आधार पर एरियर भी दिया जाए।

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कई कर्मचारियों में यह चिंता भी है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद DA (महंगाई भत्ता), HRA (हाउस रेंट अलाउंस) और TA (ट्रैवल अलाउंस) बंद हो सकते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। वेतन आयोग लागू होने तक सभी भत्ते 7वें वेतन आयोग के नियमों के आधार पर मिलते रहेंगे। DA में बढ़ोतरी भी हर 6 महीने में जारी रहेगी। उदाहरण के तौर पर, मौजूदा DA 58% है और अगले 18 महीनों में यह अनुमानित रूप से 67% तक पहुंच सकता है। वास्तविक बढ़ोतरी CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) पर निर्भर करेगी।

कर्मचारी संगठनों ने ToR में मौजूद “गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अनफंडेड लागत” वाले शब्द को हटाने की भी अपील की है। उनका कहना है कि यह पेंशन व्यवस्था को बोझ बताने का प्रयास है, जबकि यह कर्मचारियों का अधिकार और उनकी सेवा का सम्मान है।

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