DB । हरियाणा से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। 25 साल की राष्ट्रीय स्तर की टेनिस खिलाड़ी और कोच राधिका यादव की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि राधिका के कत्ल का आरोप उसके अपने पिता पर लगा है।
हरियाणा की उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। स्टेट लेवल की टेनिस प्लेयर और कोच राधिका को उसी के पिता 49 वर्षीय दीपक यादव ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। यह दिल दहला देने वाली घटना गुरुवार को हुई, और जैसे ही ये खबर सामने आई, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी पिता दीपक यादव ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस को दिए बयान में 49 वर्षीय दीपक यादव ने कहा कि वह बेटी के टेनिस अकादमी खोलने के फैसले से नाराज था। उसने कई बार राधिका को समझाने की कोशिश की कि वो अकादमी बंद कर दे, लेकिन राधिका ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए मना कर दिया। दीपक ने यह भी बताया कि गांव के लोग उसे ताना देते थे कि वह बेटी की कमाई पर पल रहा है, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हो गया था। इस सामाजिक दबाव और आत्मसम्मान के टकराव ने उसे इतना तोड़ दिया कि उसने अपनी ही बेटी की जान लेने का निर्णय ले लिया।
केस में एक और एंगल सामने आया है — राधिका की सोशल मीडिया एक्टिविटी और उसका इन्फ्लुएंसर बनने का सपना। राधिका इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय थी, टेनिस के वीडियोज़ बनाती थी और सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं को प्रेरित करती थी। मगर दीपक को ये सब नागवार गुजरता था। सूत्रों का दावा है कि दीपक बेटी की रील बनाना, इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहना और “फेम की चाह” को ‘घर की मर्यादा’ के खिलाफ मानता था। यही नहीं, वह यह भी सोचता था कि उसकी बेटी अब उसके नियंत्रण में नहीं रही, और वह खुद के फैसले लेने लगी है।
दीपक की इसी असुरक्षा और सामाजिक दबाव ने राधिका की ज़िंदगी लील ली। गुरुवार को बहस के बाद, उसने पीछे से पांच गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन राधिका को लगीं। राधिका की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या का कारण मुख्य रूप से स्पष्ट नही है , पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी है और हर एंगल की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, एक सपने की बेरहम मौत है — उस बेटी के सपने की, जो अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने पिता का नाम रोशन कर रही थी।इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बेटियों की उड़ान कई बार अपनों के ही अहंकार और असुरक्षा का शिकार बन जाती है।
