DB l नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर जारी आंदोलन के बीच सोमवार को उस समय नया मोड़ आ गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के दावे से खुद ही पीछे हट गई। इससे पहले पार्टी की ओर से सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि दीपके को दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई है, लेकिन पुलिस ने तत्काल इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि अभिजीत दीपके को न तो हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है।
बाद में सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर नया बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अभिजीत दीपके न तो हिरासत में हैं और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इस घटनाक्रम ने आंदोलन के दौरान सामने आए दावों और आधिकारिक जानकारी के बीच अंतर को लेकर चर्चा तेज कर दी।
इसी बीच संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई तथा एक जगह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। गर्मी और भीड़ के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों के अस्वस्थ होने की भी खबर सामने आई।
आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत भी हुई। सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद नड्डा ने कहा कि सरकार को शाम करीब चार बजे लिखित ज्ञापन प्राप्त हुआ है और प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर प्रशासन को सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग देने की अपील की गई है। हालांकि, सीजेपी का कहना है कि उनकी मांगों पर अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम आश्वासन नहीं मिला है।

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तथा कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है।
इस बीच, अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन सदस्यों ने विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों की अपील पर अपनी 23 दिन पुरानी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वहीं सोनम वांगचुक का आंदोलन और प्रदर्शनकारियों की आगे की रणनीति पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
