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DB l नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। लगातार अनशन के कारण उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है, जिससे उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी बीच यह आंदोलन अब केवल छात्रों के भविष्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

राहुल गांधी की दूरी पर उठे सवाल

वांगचुक के आंदोलन के बीच सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अब तक जंतर-मंतर नहीं पहुंचे हैं। इसे लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कांग्रेस ने इस आंदोलन पर आधिकारिक समर्थन की घोषणा नहीं की है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने खुला पत्र लिखकर सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों की चिंताओं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में उठाया जाएगा।

बातचीत और लोकतांत्रिक समाधान की अपील

शशि थरूर ने केंद्र सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था युवाओं का अधिकार है और इस मुद्दे का समाधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए, न कि लंबी भूख हड़ताल के जरिए।

स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिसमें उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि लगातार अनशन से उनकी जान को खतरा हो सकता है।

बॉलीवुड और समाज का समर्थन

वांगचुक के समर्थन में कई फिल्मी हस्तियां भी सामने आई हैं। स्वरा भास्कर ने जंतर-मंतर पहुंचकर उनसे मुलाकात की, जबकि शबाना आजमी, अभय देओल, जीनत अमान, ओमी वैद्य, सोनी राजदान और श्रेया धनवंतरी सहित कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। सभी का कहना है कि देश को उनकी आवाज और नेतृत्व की जरूरत है, इसलिए उनका स्वस्थ रहना अधिक महत्वपूर्ण है।

सोनम वांगचुक का आंदोलन अब छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, राजनीतिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक संवाद जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में संसद, न्यायपालिका और सरकार की प्रतिक्रिया इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है।

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