DB l अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल कम होने की संभावना नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल सस्ता होने का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर तुरंत नहीं दिखाई देगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होतीं, बल्कि इसमें परिवहन, लॉजिस्टिक्स, कर व्यवस्था और तेल कंपनियों की लागत जैसे कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि सस्ता कच्चा तेल भारत तक पहुंचने में समय लगता है, विशेषकर तब जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों का दबाव अधिक हो।
सुरेश गोपी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने भी वित्तीय बोझ का बड़ा हिस्सा अपने ऊपर लिया, जिससे लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

मंत्री ने कहा कि हाल ही में ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर करीब 3.94 रुपये की बढ़ोतरी का असर पड़ा है, लेकिन केवल कच्चे तेल की कीमत घटने के आधार पर इसे तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता। सरकार को तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद होर्मुज मार्ग खुलने से वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं और आपूर्ति सामान्य होती है, तो आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं को भी ईंधन कीमतों में राहत मिल सकती है।
