DB l सिवनी। बिजली विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी का मामला सामने आने के बाद सिवनी में चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामला उस समय सुर्खियों में आया जब सुनील बरमैया ने आरोप लगाया कि उसे सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे 63 हजार रुपये लिए गए।
शिकायत में धर्मेंद्र बरमैया और बिजली विभाग से जुड़े बताए जा रहे अनिल डहरवाल का नाम सामने आया। मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और रकम लौटाने पर सहमति बन गई। लेकिन समझौते के बाद भी कई ऐसे सवाल हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस पूरे मामले में मस्तराम वर्मा की भूमिका को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि नौकरी दिलाने के नाम पर रकम ली गई थी, तो आखिर इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां कहां तक जुड़ी हुई हैं?
मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि शिकायत, आरोप और रकम के लेन-देन की चर्चा के बीच पूरा विवाद समझौते पर जाकर समाप्त हो गया। ऐसे में कई लोगों का मानना है कि यदि गहराई से जांच हो तो और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से किसी बड़े नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बेरोजगारी के दौर में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह मामला एक बड़ी सीख भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नौकरी के लिए केवल आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया पर ही भरोसा करना चाहिए और किसी व्यक्ति को पैसे देकर नौकरी पाने के दावों से बचना चाहिए।
थाने में समझौते के बाद मामला शांत नजर आ रहा है, लेकिन सवाल बरकरार! नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों का खेल कबतक ?
