DB l पीएम मोदी की अपील- राजनीति से ऊपर उठकर लें फैसलाl
नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान आज महिला आरक्षण बिल को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। नरेंद्र मोदी ने सदन में विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीति के तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्रहित में देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष इस बिल का विरोध करता है तो इसका राजनीतिक लाभ सरकार को मिल सकता है, लेकिन अगर सभी दल साथ आते हैं तो यह देश के लोकतंत्र की जीत होगी। उन्होंने विपक्ष को “क्रेडिट का ब्लैंक चेक” देने की बात भी कही और भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे पर किसी तरह की राजनीतिक बढ़त नहीं चाहती।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह बिल किसी का उपकार नहीं, बल्कि महिलाओं का अधिकार है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं को उनका हक देने में दशकों की देरी हुई है और अब और विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पूरे देश में खुशी का माहौल था और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया गया था।

संसद में यह बहस लोकसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर केंद्रित है। सरकार का लक्ष्य 2029 के चुनावों से पहले महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना है।
हालांकि विपक्ष ने इस प्रस्ताव पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परिसीमन और सीटों के बंटवारे के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। वहीं कुछ दलों ने इसे सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन से जोड़कर भी देखा है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि अगर सभी दल एकजुट होकर इस बिल का समर्थन करते हैं तो यह किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे देश की जीत होगी। उन्होंने कहा कि “महिला शक्ति पर भरोसा करना होगा” और यही समय की मांग है।
संसद में जारी इस बहस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर आने वाले चुनावों और देश की राजनीति पर लंबे समय तक पड़ने वाला है।
