DB l नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना पर रोक लगाने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर जमकर फटकार लगाई। उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा, “आप लोग इस तरह की बदतमीजी भरी भाषा कहां से लाते हैं?”
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए साफ किया कि अदालत में अभद्र और अस्वीकार्य भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुआ था, लेकिन उसकी दलीलों से पहले ही याचिका की भाषा पर सवाल खड़े हो गए।

याचिका में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जाति जनगणना को रोकने, संसाधनों के पुनर्वितरण को जनसंख्या जिम्मेदारी से जोड़ने और एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने जैसी मांगें शामिल थीं। इसके अलावा कई अन्य नीतिगत मुद्दों को भी याचिका में जोड़ा गया था, जिस पर कोर्ट ने अप्रसन्नता जताई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सीधे कोर्ट आने के बजाय पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए और प्रशासनिक स्तर पर समाधान तलाशना चाहिए।
गौरतलब है कि 2027 की प्रस्तावित जनगणना देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी, जिसमें 1931 के बाद पहली बार व्यापक स्तर पर जातिगत आंकड़े शामिल किए जाने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में मर्यादा और भाषा की गरिमा सर्वोपरि है।
