DB l जबलपुर में पत्रकार सुनील सेन पर हुए हमले का मास्टरमाइंड अस्पताल संचालक अमित खरे आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। एक सप्ताह से फरार चल रहे आरोपी को गढ़ा थाना पुलिस ने दमोह जिले से गिरफ्तार किया। जानकारी के अनुसार अमित अपनी साली के घर में छिपकर बैठा हुआ था। इससे पहले इस मामले में शामिल दो आरोपियों मोनू और राज को पुलिस पहले ही पकड़ चुकी थी।
दरअसल पूरा विवाद पत्रकार सुनील सेन द्वारा लगातार अस्पताल की लापरवाहियों और अवैध गतिविधियों की खबरें प्रकाशित करने से शुरू हुआ। बताया गया कि अमित खरे मरीजों से इलाज के नाम पर भारी वसूली करता था और कई बार गलत इलाज तथा लापरवाही के कारण उसके अस्पताल सुर्खियों में रहे। यही नहीं, वह एम्बुलेंस चालकों को रोककर मरीजों को जबरन अपने अस्पताल लाने का दबाव बनाता था। जो चालक इनकार करता, उसे मारपीट और धमकियों का सामना करना पड़ता। इन गतिविधियों का खुलासा होने के बाद सुनील ने अपने पोर्टल पर एक के बाद एक खबरें छापीं।

खबरें प्रकाशित होने से बौखलाए अमित ने पहले पत्रकार को धमकाया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उसने अपने साथियों के साथ मिलकर हमला करने की साजिश रच डाली। पुलिस के अनुसार, 29 और 30 अगस्त की दरमियानी रात को सुनील जब बाइक से घर लौट रहे थे, तभी सिंघई पेट्रोल पंप के पास घात लगाए बैठे अमित खरे और उसके गुर्गों ने लाठी, डंडे और बेसबॉल से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में सुनील गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर, हाथ और कमर में गहरी चोटें आईं। घायल अवस्था में स्थानीय लोगों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पत्रकार और पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे। सुनील ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि बदमाश पिस्टल और बेसबॉल लेकर आए थे और जान से मारने की नीयत से हमला किया। इस मामले में गढ़ा थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हत्या के प्रयास की धारा के तहत केस दर्ज किया। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मास्टरमाइंड अमित खरे फरार हो गया था।
पुलिस को शुक्रवार देर रात सूचना मिली कि अमित अपनी साली के घर दमोह में छिपा हुआ है। इसके बाद टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पुलिस को एक दिन की रिमांड मिली है। अब पुलिस उससे घटना में प्रयुक्त कार और हथियारों के बारे में पूछताछ कर रही है।
