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DB l मध्यप्रदेश में पर्यटन ने पकड़ी रफ्तार, नए आकर्षण बने पर्यटकों की पहली पसंद

कोविड काल के बाद से मध्यप्रदेश में पर्यटन तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2023 में जहाँ 11 करोड़ पर्यटक आए, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 13 करोड़ तक पहुँच गई। प्रदेश में पर्यटन 20 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से विकास कर रहा है। धार्मिक स्थलों की बात करें तो उज्जैन सबसे ऊपर है। पिछले साल यहाँ 7 करोड़ श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। महाकाल लोक के भव्य निर्माण ने उज्जैन को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई।

दूसरे स्थान पर मैहर का मां शारदा मंदिर, तीसरे पर अमरकंटक का नर्मदा उद्गम स्थल रहा। इसके अलावा ओंकारेश्वर में 109 फीट ऊँची आदि शंकराचार्य की प्रतिमा और 2200 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट से पर्यटन को नई दिशा मिल रही है।

प्राकृतिक सुंदरता की बात करें तो पचमढ़ी (सतपुड़ा की रानी), भीमबेटका की गुफाएँ, खजुराहो के विश्वप्रसिद्ध मंदिर, सांची स्तूप, ग्वालियर का किला, मांडू की ऐतिहासिक धरोहर, और भीलानी (भोजपुर का शिव मंदिर) पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

जबलपुर में भेड़ाघाट की संगमरमर की चट्टानें और धुआंधार जलप्रपात, वन्यजीव प्रेमियों के लिए कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा और पन्ना टाइगर रिज़र्व विशेष आकर्षण हैं।

प्रदेश सरकार अयोध्या, वाराणसी और पुरी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक स्पेशल रेलगाड़ियाँ भी चला रही है, ताकि पर्यटकों को धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं का बेहतर अनुभव मिल सके।

मध्यप्रदेश आज “भारत का दिल” ही नहीं बल्कि पर्यटन का केंद्र बन चुका है।

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