जबलपुर । खराब सड़कें सिर्फ विकास की रफ्तार नहीं रोकते, ये भ्रष्टाचार की गहराई और व्यवस्था की लाचारी को उजागर करते हैं। जब तक पारदर्शिता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक “विकास” सिर्फ नारों तक ही सीमित रहेगा।
राज्य में विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े-बड़े दावे तो खूब होते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है । सड़कों की बदहाल स्थिति आज भी आम जनता की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है। यह सिर्फ एक बुनियादी सुविधा की कमी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, लापरवाही और सिस्टम की विफलता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।
जबलपुर शहर में सड़कें सिर्फ बरसात में ही नहीं, हर मौसम में परेशान करती हैं। हर मौसम अपनी अलग समस्या लाता है, लेकिन सड़कें हमेशा एक जैसी – बदहाल और अधूरी। सड़कें बरसात के मौसम में दलदल में तब्दील हो जाती हैं। कई जगहों पर वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीण शेत्र के रहवासियों का कहना है कि सालों से सड़क के नाम पर बजट तो आता है, लेकिन काम सिर्फ कागज़ों में होता है। कई इलाकों में गड्ढों में सड़क ढूंढना मुश्किल हो गया है। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन शासन-प्रशासन बेखबर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक बार बनी सड़क दो महीने भी नहीं टिकती सड़कें टूटकर धूल उड़ाने लगी हैं। कई जगहों पर आधी-अधूरी खुदाई छोड़ दी गई है, जिससे सड़कें रेत, सीमेंट और मलबे के अड्डे में तब्दील हो गई हैं। इस धूल भरी हालत का सबसे ज्यादा असर बाइक सवारों, पैदल यात्रियों और स्कूली बच्चों को झेलना पड़ रहा है। खुली हवा में धूल उड़ने से सांस और आंखों की बीमारियां बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन चुप है।
जबलपुर शहर में चल रहे सीवर लाइन कार्य आमजन के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। नगर निगम और संबंधित एजेंसियों द्वारा शुरू किए गए ये कार्य न तो समय पर पूरे हो पा रहे हैं और न ही किसी योजना के तहत चल रहे हैं। सड़कों को बिना सूचना के खोद दिया जाता है, और महीनों तक ऐसे ही अधूरी हालत में छोड़ दिया जाता है।
क्षेत्रों में सड़कों की खुदाई के बाद न मरम्मत हुई, न साफ-सफाई, जिससे धूल, कीचड़ और जाम की स्थिति रोजाना बन रही है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि बिना किसी बैरिकेडिंग या संकेतक के खुदी सड़कों से रोजाना वाहन फिसल रहे हैं, कई लोग घायल भी हो चुके हैं।
सड़कें बनने के कुछ ही महीनों के भीतर उखड़ जाती हैं। सड़क निर्माण में घटिया सामग्री और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद की जा रही है।
जबलपुर के पिछड़े इलाकों में सड़के नाम मात्र की हैं। कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां पहुंचने के लिए लोगों को कच्चे रास्तों से घंटों पैदल चलना पड़ता है।
संस्कारधानी की सड़कें आज विकास की रफ्तार बढ़ाने की बजाय जानलेवा जाल बन चुकी हैं। सड़क की खस्ताहाली, गड्ढे, जलभराव और घटिया निर्माण की खबरें सामने आ रही हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भी नतीजा—हर बरसात में बहती सड़कें, हर दिन नए गड्ढे और हर महीने कोई न कोई हादसा।
