बिहार में आज वोटर लिस्ट रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण) (Special Intensive Revision – SIR) के विरोध का ऐलान किया, जिसका व्यापक असर राज्य के कई जिलों में देखने को मिला। पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, आरा, सहरसा समेत कई जगहों पर सड़कें जाम रहीं, ट्रेनें रोकी गईं और बाजार पूरी तरह बंद रहे। सड़क से संसद तक विरोध का माहौल बना रहा, वहीं पटना समेत कई जिलों में जनजीवन प्रभावित रहा।
महागठबंधन के नेताओं ने बंद को सफल बनाने के लिए खुद मोर्चा संभाला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने पटना में महात्मा गांधी सेतु पर जाम लगाया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले यह वोटर लिस्ट रिवीजन गरीब, दलित, अल्पसंख्यक और प्रवासी वोटरों को सूची से बाहर करने की एक “साजिश” है।
राजद, कांग्रेस, वाम दलों और अन्य सहयोगी पार्टियों ने आरोप लगाया कि यह मतदाता सूची पुनरीक्षण गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं को सूची से बाहर करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि यह चुनावी धांधली का एक तरीका है और इससे लोकतंत्र कमजोर होगा।

जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव ने बंद का आह्वान करते हुए इसे “वोटबंदी” करार दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों के पास दस्तावेज नहीं हैं, और उन्हें जानबूझकर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। पप्पू यादव ने बताया कि इस मुद्दे पर वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
बंद के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा भी देखने को मिली। नालंदा में RJD कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पत्थरबाजी में कई लोग घायल हुए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। राज्य के कई हिस्सों में बंद के दौरान प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर ट्रेनें रोकी गईं और सड़कों पर टायर जलाकर आवागमन बाधित किया गया। नालंदा में प्रदर्शन के दौरान झड़प और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
दिलचस्प बात यह रही कि चुनाव आयोग के अधिकारी राजधानी पटना स्थित कार्यालय में महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल के आने की प्रतीक्षा में गेट पर तैनात रहे, लेकिन कोई भी नेता या प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचा। इससे आयोग के स्तर पर संवाद की कोशिश अधूरी रह गई और बंद केवल सड़कों तक सीमित दिखा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया विधिसम्मत है और किसी भी वैध मतदाता को सूची से हटाने का उद्देश्य नहीं है। केवल मृत, डुप्लीकेट या गलत प्रविष्टियों को हटाया जा रहा है।

चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को जायज ठहराते हुए कहा है कि रिवीजन कानून के अनुसार हो रहा है और किसी भी वैध वोटर का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। केवल मृत, डुप्लीकेट या गलत तरीके से जुड़े नाम हटाए जा रहे हैं।
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर 10 जुलाई को सुनवाई तय है। महागठबंधन का कहना है कि कोर्ट से उन्हें न्याय की उम्मीद है।
