DB ।जबलपुर। प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। धार, गुना, बालाघाट और शहडोल में नए वेटरनरी डिप्लोमा कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन संस्थानों को वेटरनरी विश्वविद्यालय जबलपुर से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में वेटरनरी डिप्लोमा कॉलेजों की संख्या बढ़कर 14 हो जाएगी।
हालांकि कॉलेजों को मंजूरी देने से पहले संबंधित संस्थानों में उपलब्ध भूमि, भवन, प्रयोगशाला और शैक्षणिक सुविधाओं की मौके पर जांच की जाएगी। विश्वविद्यालय ने इसके लिए जांच कमेटी गठित की है। करीब आठ नए कॉलेजों के प्रस्ताव विश्वविद्यालय के पास पहुंचे हैं, जिनमें से चार संस्थानों का खुलना लगभग तय माना जा रहा है।

8 एकड़ जमीन समेत कई सुविधाएं जरूरी
नए कॉलेजों के लिए निर्धारित मापदंडों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इनमें कम से कम आठ एकड़ जमीन, पर्याप्त क्लासरूम, लाइब्रेरी, खेल मैदान और छात्रावास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा नहीं, बल्कि पशु चिकित्सा और पशुपालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इसके लिए डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म, प्रयोगशाला और क्लीनिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था जरूरी होगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि उपलब्ध संसाधन सिर्फ कागजों पर दर्ज हैं या वास्तव में विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए काम करने की स्थिति में हैं।
AVFO भर्ती के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित युवा
वेटरनरी डिप्लोमा कॉलेजों के विस्तार का एक प्रमुख उद्देश्य भविष्य में पशुपालन विभाग में होने वाली असिस्टेंट वेटरनरी फील्ड ऑफिसर (AVFO) जैसी भर्तियों के लिए प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता बढ़ाना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य, प्राथमिक उपचार और पशुपालन संबंधी तकनीकी सहायता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वर्तमान में पांच शासकीय कॉलेज जबलपुर, महू, रीवा, भोपाल और मुरैना में तथा पांच निजी कॉलेज इंदौर, ग्वालियर, भिंड, झाबुआ और विदिशा में संचालित हैं।
“नए कॉलेजों का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।” — प्रो. मनदीप शर्मा, कुलपति, वेटरनरी विश्वविद्यालय
