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DB l नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत की राह निचली अदालत से होकर तय करने की सलाह मिली है। बुधवार को न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आंदोलन के उद्देश्य, प्रदर्शनकारियों की पहचान और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाए। अदालत की मौखिक टिप्पणियों में ‘तब और अब’ के अंतर के साथ सत्ता परिवर्तन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भी जिक्र हुआ।
‘तब छात्र आंदोलन था, अब मुद्दा अलग है’
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने जुलाई में नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय आंदोलन छात्रों का था, जबकि मौजूदा मामले में मुद्दा अलग है। अदालत ने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों का संबंधित मुद्दे से क्या संबंध है और उनकी संस्था का उद्देश्य क्या है।

पीठ ने कहा कि जब शांति और कानून-व्यवस्था को लेकर आशंका होती है, तब ऐसे सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अदालत की टिप्पणी का आशय था कि किसी प्रदर्शन की प्रकृति, उसके उद्देश्य और उसमें शामिल लोगों की भूमिका को समझना जरूरी है।
‘रेजीम चेंज’ पर भी अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रसाद ने सत्ता परिवर्तन के संदर्भ में कहा कि ‘रेजीम चेंज’ बैलेट यानी चुनाव के जरिए होता है। अदालत ने प्रदर्शन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बीच अंतर को रेखांकित किया।

पहले एसईएम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार
सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दोनों को 13 अक्टूबर को प्रतिबंधित जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर प्रवेश कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई थीं।
हाईकोर्ट ने उन्हें पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष सुनवाई का परिणाम देखने और राहत नहीं मिलने पर उचित अपीलीय अदालत जाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों ने याचिका वापस ले ली। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
