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DB ।जबलपुर। स्वदेशी रक्षा तकनीक को नई ऊंचाई देने वाली 155 एमएम धनुष तोप अब और अधिक मारक क्षमता और अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान धनुष की प्रभावी भूमिका के बाद इसके आधुनिक संस्करण पर तेजी से काम किया जा रहा है। जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) में नए वर्जन की पहली खेप में 12 तोपें तैयार की जा रही हैं, जबकि सेना को कुल 62 आधुनिक धनुष तोपें उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
38 से 46 किलोमीटर तक बढ़ेगी मारक क्षमता
नए संस्करण में सबसे बड़ा बदलाव इसकी रेंज को लेकर होगा। मौजूदा करीब 38 किलोमीटर की मारक दूरी को बढ़ाकर 44 से 46 किलोमीटर तक करने की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही 45 कैलिबर की जगह नए धनुष में 52 कैलिबर की क्षमता शामिल की जाएगी। इससे लंबी दूरी पर लक्ष्य साधने की क्षमता और मजबूत होगी।

विदेशी चिप की जगह स्वदेशी तकनीक
आधुनिक धनुष की खासियत केवल इसकी बढ़ी हुई रेंज नहीं है। इसके जरिए रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। धनुष में इस्तेमाल होने वाली इजराइल निर्मित चिप की जगह बीएचईएल द्वारा निर्मित स्वदेशी चिप लगाए जाने की योजना है।
नई प्रणाली में डिजिटल फायर कंट्रोल, उन्नत रेडियो फ्रिक्वेंसी और एक्टिव रडार चिप्स, रडार-लिंक्ड सेंसिंग, GPS आधारित ऑटो-लेइंग और ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जा रहा है।
पहाड़ों में भी बढ़ेगी ताकत
नए धनुष संस्करण में माउंटेन गन सिस्टम जैसी क्षमताएं शामिल किए जाने से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में इसकी उपयोगिता बढ़ेगी। बोफोर्स की तकनीक पर आधारित धनुष को जीसीएफ ने वर्षों के तकनीकी विकास के जरिए आधुनिक स्वरूप दिया है।
अब नया अपग्रेड रेंज, सटीकता, डिजिटल तकनीक और स्वदेशीकरण—चारों स्तरों पर भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
