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DB।जबलपुर। इस बार की बारिश किसानों के साथ जबलपुर शहर के लाखों लोगों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आई है। परियट और खंदारी जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंचने से करीब 3 लाख घरों में अब दो समय नियमित जलापूर्ति शुरू हो गई है। जलाशयों में पानी कम होने के कारण पिछले करीब तीन माह से शहर की बड़ी आबादी को एक समय ही पानी मिल रहा था। अब हालात सुधरने के साथ अगले गर्मी के मौसम में भी जलसंकट से राहत की उम्मीद जगी है।

अमृत 2.0 बनेगा स्थायी समाधान
शहर में लंबे समय से गर्मियों में सामने आने वाले जलसंकट के स्थायी समाधान के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 312 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है। परियोजना का करीब 36 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नगर निगम का दावा है कि मई 2027 तक योजना का शत-प्रतिशत काम पूरा कर लिया जाएगा।
योजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी गौरीघाट के ललपुर से रांझी तक करीब 20 किलोमीटर लंबी राइजिंग मेनलाइन है। ललपुर में करीब 100 फीट गहराई का इंटकवेल बनाया जा रहा है, जिसका लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यहां से नर्मदा का पानी पाइपलाइन के जरिए रांझी तक पहुंचाया जाएगा।

475 किमी नई पाइपलाइन, बढ़ेगी क्षमता
सूत्रों क अनुसार परियोजना के तहत करीब 475 किलोमीटर पेयजल आपूर्ति लाइन का विस्तार किया जाएगा। साथ ही रांझी जलशोधन संयंत्र में 54 एमएलडी क्षमता का नया प्लांट बनाया जा रहा है। इससे संयंत्र की कुल क्षमता 54 से बढ़कर 108 एमएलडी हो जाएगी।
परियट-खंदारी पर निर्भरता होगी कम
रांझी, मानेगांव, गोकलपुर, कांचघर, शोभापुर और कैंट क्षेत्र की बड़ी आबादी फिलहाल परियट और खंदारी जलाशयों पर निर्भर है। गर्मियों में जलस्तर गिरने से यहां संकट गहरा जाता है। अमृत 2.0 के पूरा होने के बाद करीब 3 लाख घरों की जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और अगले कई दशकों तक पानी की जरूरत पूरी करने का लक्ष्य है।
बारिश ने फिलहाल राहत दी है, लेकिन अब निगाहें अमृत 2.0 के समय पर पूरा होने पर टिकी हैं।
