DB l जबलपुर बनेगा टूरिज्म हब: भेड़ाघाट से रोज उड़ानें प्रमुख गंतव्यों तक …
मध्यप्रदेश में पर्यटन विकास को नई दिशा देने के लिए गुरुवार से पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा की शुरुआत होने जा रही है। इस नई एयर कनेक्टिविटी सुविधा का मुख्य केंद्र जबलपुर का भेड़ाघाट होगा, जहाँ से सप्ताह में पाँच दिन हेलीकॉप्टर के माध्यम से प्रमुख पर्यटन स्थलों—कान्हा, बांधवगढ़, मैहर, अमरकंटक और चित्रकूट—तक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा संभव हो सकेगी।
भेड़ाघाट में सुबह 10 बजे शुरू होने वाली इस सेवा के लिए फ्लाईओला कंपनी को संचालन का जिम्मा दिया गया है, जिसने जबलपुर के पास अपना हेलीकॉप्टर बेस स्थापित किया है। पर्यटकों को उनकी पसंद के गंतव्य तक पहुँचाने के लिए सभी स्थलों पर लैंडिंग बेस तैयार किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, बुकिंग ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आसानी से की जा सकेगी।

जबलपुर से विभिन्न पर्यटन स्थलों के लिए किराया—
जबलपुर से बांधवगढ़ 3,750 रुपये, बांधवगढ़ से कान्हा 2,500 रुपये, कान्हा से बांधवगढ़ 2,500 रुपये, जबलपुर से अमरकंटक 5,000 रुपये, मैहर से चित्रकूट 2,500 रुपये और मैहर से जबलपुर 5,000 रुपये रखा गया है।
यह सेवा प्रदेश के हवाई पर्यटन को एक नए युग में ले जाने का लक्ष्य रखती है, जिसमें आध्यात्मिक, इको और वाइल्डलाइफ़ पर्यटन को प्राथमिकता दी गई है। उज्जैन–ओंकारेश्वर मार्ग पर अब 20 से 40 मिनट में ज्योर्तिलिंगों के दर्शन किए जा सकेंगे। इंदौर से उज्जैन की उड़ान का किराया 5,000 रुपये और उज्जैन–ओंकारेश्वर का किराया 6,500 रुपये निर्धारित किया गया है।
इको टूरिज्म सेक्टर के तहत भोपाल–मढ़ई–पचमढ़ी मार्ग पर 20 मिनट से 1 घंटे की उड़ानें उपलब्ध रहेंगी, जिनका किराया 3,000 से 5,000 रुपये तक है। पचमढ़ी में नेचर-आधारित जॉय-राइड्स भी यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगी।वाइल्डलाइफ़ सेक्टर में जबलपुर से कान्हा, बांधवगढ़ और अमरकंटक तक पहुंचना अब अधिक सरल होगा। तेज हवाई संपर्क से पर्यटक कम समय में अधिक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे, जिससे प्रदेश की टूरिज्म क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। इसके अलावा सतना–रीवा–खजुराहो सहित पूर्व से संचालित वायु पर्यटन सेवाओं को भी बेहतर कनेक्टिविटी के साथ मजबूत किया गया है, जिससे क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि की उम्मीद है।
पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा प्रदेश में तेज, सुविधाजनक और सुलभ पर्यटन का नया मॉडल पेश कर रही है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक, आध्यात्मिक और वन्यजीव स्थलों को एकीकृत हवाई नेटवर्क से जोड़कर मध्यप्रदेश को शीर्ष पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
