नीति और धर्म दोनों स्तरों पर छोटा-सा लेकिन घातक संघर्ष चल रहा है।
दलाई लामा की आध्यात्मिक परंपरा में उनकी आत्मा पुनर्जन्म (Tulku) के रूप में किसी बच्चे में आती है। वरिष्ठ भिक्षुओं को दिव्य संकेतों, स्वप्नों व अन्य गूढ़ प्रक्रिया के आधार पर नए जन्म की पहचान करनी होती है । 2015 में स्थापित Gaden Phodrang Trust को 14वें दलाई लामा द्वारा ही इस पूरी प्रक्रिया का अधिकार सौंपा गया है, और वे ही निर्णायक होंगे।
चीन का दावा है कि “गोल्डन अर्न” लॉटरी प्रणाली का इस्तेमाल करके वह इस तरह की पुनर्जन्म नियुक्तियों पर नियंत्रण कर सकता है, और इस प्रक्रिया के लिए दलाई लामा का जन्म चीन में ही होना चाहिए । बीजिंग, भारत और अन्य देशों में चुने गए किसी भी युवा को अवैध घोषित करने की बात कर चुका है ।1995 में, दलाई लामा द्वारा चुने गए पंचेन लामा को बीजिंग ने किडनैप कर लिया था और अपना विकल्प नियुक्त किया—उससे भी विश्व समुदाय में जबरदस्त विवाद खड़ा हुआ था ।
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल दलाई लामा तथा उनकी सीट (Trust) को ही उत्तराधिकारी चुनने का अधिकार है, चीन को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई दर्जा नहीं । सार्वजनिक बयान में कहा गया कि यह एक “स्थापित परंपरा” है और इसमें चीन या भारत का कोई अधिकार नहीं। भारत ने साफ कर दिया है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन केवल तिब्बती धर्मगुरुओं व उनकी आध्यात्मिक संस्थाओं द्वारा ही किया जा सकता है—चीन इस प्रक्रिया में बौखलाकर हस्तक्षेप की कोशिश कर सकता है, लेकिन वह सफल नहीं होगा।
