DB l बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में हार की पूरी जिम्मेदारी अपनी कंधों पर ली है। मंगलवार को पटना में पाटिलपुत्र गोलंबर स्थित अपने कैंप में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा जीत पाने में नाकामयाब रहने का दोष सिर्फ और सिर्फ उनका है।
उन्होंने माना कि उनकी पार्टी जनसुराज की चुनावी रणनीति और उच्च आकांक्षाओं में “कुछ गलत रहा होगा” जिसने वोट में तब्दील नहीं हो पाया। किशोर ने स्पष्ट किया कि यह हार “व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में सत्ता परिवर्तन” न कर पाने की उन्हें व्यक्तिगत कमज़ोरी है।
अपने प्रायश्चित का इज़हार करते हुए उन्होंने घोषणा की है कि 20 नवंबर को गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखेंगे, ताकि आत्मचिंतन किया जा सके और आने वाली रणनीति पर सोच-विचार किया जाएकिशोर ने कहा कि उनकी बिहार को सुधारने की जिद कहां खत्म नहीं होगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे “बिहार छोड़ने” की बात नहीं कर रहे — उनकी लड़ाई लोगों की आवाज़ और बेहतर व्यवस्था बनाने की है।

वहीँ, हार का विश्लेषण करते हुए उन्होंने यह भी उठाया कि चुनाव के दौरान जनसुराज के कुछ उम्मीदवारों को बीजेपी की धमकियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इन मसलों की जांच की अपील की। किशोर ने नोट किया कि उनकी पार्टी ने “लोक-केन्द्रित मुद्दों” जैसे पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वरोजगार पर जोर दिया था, लेकिन चुनावी नतीजे में यह संदेश वांछित असर नहीं छोड़ पाया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जीतने वाले नेताओं को बधाई दी और कहा कि अब उनकी जवाबदेही है कि वे बिहार की रोज़ी-रोज़गार की समस्या, पलायन और लोक भरोसे की उम्मीदों को पूरा करें। प्रशांत किशोर ने यह दोहराया कि हार पर “मेरा सिर उठाकर” वह स्वीकार कर सकते हैं कि “गलती हुई है, लेकिन गुनाह नहीं।” और नए सिरे से जन सुराज पार्टी की नीति और संकल्पों को लेकर पुनर्गठन का रास्ता तलाशने की तैयारी में हैं।
