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DB । मानसून की तेज बारिश ने मध्यप्रदेश के ताप विद्युत गृहों के लिए चिंता बढ़ा दी है। कोयला खदानों में पानी भरने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है, वहीं गीले कोयले की वजह से रेलवे रैक की अनलोडिंग में सामान्य से कई गुना ज्यादा समय लग रहा है। इसका सीधा असर पावर प्लांटों तक कोयले की आपूर्ति पर पड़ रहा है। यदि सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

खंडवा में सबसे गंभीर स्थिति
सूत्रों के अनुसार खंडवा ताप विद्युत गृह में वर्तमान में करीब 90 हजार टन कोयला उपलब्ध है, जबकि प्रतिदिन लगभग 25 हजार टन की खपत हो रही है। इस हिसाब से यहां महज 3 से 4 दिन का स्टॉक बचा है। सामान्य दिनों में एक कोयला रैक को खाली करने में करीब 4 से 5 घंटे लगते हैं, लेकिन बारिश के कारण अब यही समय 10 से 20 घंटे तक पहुंच गया है।
गीले कोयले ने बढ़ाई मुश्किल
बारिश का पानी भरने से खदानों से कोयला निकालने में परेशानी हो रही है। इसके साथ ही कोयले में मिट्टी की मात्रा बढ़ने और गीलेपन के कारण उसकी कैलोरिफिक वैल्यू प्रभावित हो रही है। ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए अपेक्षाकृत अधिक कोयले की जरूरत पड़ सकती है।
अन्य प्लांटों में भी सीमित स्टॉक
बिरसिंहपुर में करीब 71 हजार टन कोयला है और रोजाना 18 हजार टन खपत हो रही है, यानी लगभग 5 दिन का स्टॉक। सारणी में 1.07 लाख टन स्टॉक है और एक इकाई चलने से करीब 3500 टन प्रतिदिन खपत हो रही है, जिससे लगभग 15 दिन का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं अमरकंटक में करीब 1.02 लाख टन कोयला है और 2700 टन दैनिक खपत के हिसाब से करीब 30 दिन का स्टॉक बताया गया है।
सप्लाई चेन पर लगातार नजर
फ्यूल मैनेजमेंट विभाग कोयले की उपलब्धता और आपूर्ति की लगातार निगरानी कर रहा है। केंद्रीय स्तर पर गठित समिति भी रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रही है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती खदान से रेलवे रैक और रैक से पावर प्लांट तक कोयले की सप्लाई को सामान्य बनाए रखना है।
