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DB l मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल की सचिव गीता शुक्ला की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने अवैधानिक करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने स्पष्ट कहा कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और राज्य बार काउंसिल के नियमों का उल्लंघन कर यह नियुक्ति की गई थी। कोर्ट ने गीता शुक्ला को सचिव और सहायक सचिव पद से हटाकर मूल पद लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) पर वापस भेजने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर नियमों के अनुसार योग्य उम्मीदवार की सहायक सचिव और सचिव पद पर नियुक्ति करे। साथ ही, इस अवधि के लिए किसी योग्य व्यक्ति को तदर्थ सचिव नियुक्त करने की व्यवस्था भी करने को कहा गया है।

गीता शुक्ला (file photo)

मामले की पृष्ठभूमि में बताया गया कि गीता शुक्ला को 31 जनवरी 2022 को एलडीसी से सहायक सचिव के पद पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया था। इसके बाद 9 जुलाई 2024 को उन्हें सचिव नियुक्त कर दिया गया। इस नियुक्ति को स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों शैलेंद्र वर्मा, अहदुल्ला उसमानी, हितोषी जय हर्डिया, अखंड प्रताप सिंह और नरेंद्र जैन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिका में कहा गया कि वर्ष 2019 में सहायक सचिव पद के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें गीता शुक्ला को मात्र 5 अंक मिले थे और उनकी रैंक 12वीं थी। इसके बावजूद, चयन प्रक्रिया और योग्यता को नजरअंदाज कर उन्हें पदोन्नति दे दी गई। कोर्ट ने माना कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्टेट बार काउंसिल का सचिव पद अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस पर नियुक्ति केवल निर्धारित योग्यता और प्रक्रिया के अनुसार ही हो सकती है। नियमों की अनदेखी कर दी गई नियुक्ति न केवल अवैधानिक है, बल्कि संस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।

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