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DB l दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बेहद कम दाम पर बदलने का झांसा देकर लोगों को ठग रहा था। शालीमार बाग मेट्रो स्टेशन के पास की गई कार्रवाई में पुलिस ने चार आरोपियों —हर्ष, टेक चंद ठाकुर, लक्ष्य और विपिन कुमार — को गिरफ्तार किया और उनके पास से 3 करोड़ 59 लाख रुपये की बंद हो चुकी करेंसी और दो गाड़ियाँ बरामद कीं। पुलिस की जांच ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि नोटबंदी के नौ साल बाद भी ऐसे अवैध नोट बाजार में कैसे घूम रहे हैं और किस तरह लोग जल्द पैसा कमाने के लालच में अपराध की राह पर जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को यह झूठा भरोसा दिलाता था कि आधार कार्ड दिखाकर पुराने नोट आरबीआई में बदले जा सकते हैं। गिरोह मासूम लोगों को लालच देकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था। जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि शालीमार बाग इलाके में नोटों की अदला-बदली का खेल चल रहा है, तो टीम ने मौके पर पहुंचकर चारों को रंगे हाथों पकड़ लिया। बरामद नोटों की भारी मात्रा ने खुद पुलिस को भी चौंका दिया।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे 2021 से आशीष और तरुण नाम के दो युवकों के संपर्क में थे, जिन्होंने उन्हें करोड़ों की पुरानी करेंसी बदलने के बदले मोटा कमीशन देने का भरोसा दिया था। दो से तीन महीने पहले ही इन सभी ने मिलकर इस अवैध काम की योजना बनाई थी। मोबाइल कॉल और निर्देशों के आधार पर यह गैंग पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।

गिरफ्तार हुए चारों युवकों की मजबूरी और लालच की कहानी भी सामने आई। 28 साल का लक्ष्य, जिसकी शादी फरवरी 2026 में होने वाली थी, शादी के खर्चों के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने के दबाव में इस काम में जुड़ा। उसका चचेरा भाई हर्ष भी जल्दी पैसा कमाने के लालच में इसमें शामिल हो गया। टेक चंद ठाकुर, जो पहले जिम ट्रेनर था, बेरोजगारी और दो बच्चों के खर्चों से परेशान होकर इस जाल में फंस गया। वहीं विपिन कुमार 2021 से पुराने नोटों के कारोबार में लगे आशीष और तरुण के संपर्क में था।

पुलिस अब मुख्य आरोपियों आशीष और तरुण की तलाश कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि करोड़ों रुपये के ये पुराने नोट कहां से आए और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी बड़े पैमाने पर पुरानी करेंसी का मिलना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क अवैध कमीशन और फर्जी दावों पर आधारित था, जहां ठगने वाले ही अब ठगी के शिकार बनकर तिहाड़ की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।

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