जबलपुर । बायोगैस संयंत्र में गोबर और जैविक अपशिष्ट को वायुरहित वातावरण में किण्वित करके मीथेन आधारित गैस प्राप्त होती है, जिसे रसोई, प्रकाश, या छोटे इंजन चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
गोबर गैस न केवल ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि यह सस्ती, टिकाऊ और पर्यावरण हितेषी ऐसी तकनीक भी है, जिसका कृषि में उपयोग करने से किसानों को ऊर्जा, खाद एवं कीटनाशक तीनों का स्थाई समाधान मिल जाता है।
जबलपुर जिले की तहसील सिहोरा के ग्राम फनवानी के कृषक श्री सुरजीत पटेल ने गोबर गैस संयंत्र स्थाैपित कर कृषि के कार्यों में उर्जा, खाद एवं कीटनाशक की बचत का उदाहरण प्रस्तुसत किया है। श्री पटेल कृषि विभाग द्वारा प्रायोजित योजना के अंतर्गत गोबर गैस संयंत्र स्थापित कर कई वर्षों से अपने कृषि के कार्यों में प्रयोग कर रहे हैं।
सहायक संचालक कृषि रवि आम्रवंशी ने बताया कि कृषक श्री पटेल इस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी को पूर्णता जैविक खाद के रूप में रूपांतरित कर खेती में प्रयोग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गोबर गैस संयंत्र से निकलने वाली स्ल री नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटाश से भरपूर होती है और इस खाद को उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती हैं। कृषक सुरजीत पटेल संयंत्र से निकलने वाली बायोगैस का उपयोग भोजन पकाने एवं दैनिक कार्यों में करते हैं।
