DB । सरकारी स्कूलों में एक ओर शिक्षकों की ई-अटेंडेंस के समय को लेकर लगातार बदलते निर्देशों से असमंजस और मानसिक दबाव की स्थिति बन रही है, वहीं दूसरी ओर अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज करने की तैयारी है। विद्यार्थियों की ई-अटेंडेंस एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर दर्ज होगी।
बार-बार बदली समय-सीमा, शिक्षक बोले- स्पष्ट नियम जरूरी

शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था की समय-सीमा में लगातार बदलाव को लेकर नाराजगी सामने आ रही है। शिक्षकों के मुताबिक शुरुआत में लॉगिन का समय सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक निर्धारित किया गया था। इसके बाद इसे 9:30 से 11 बजे और फिर 9:30 से 10:30 बजे तक कर दिया गया। अब अधिकारियों की ओर से सुबह 10 बजे से पहले लॉगिन करने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आ रही है।
शिक्षकों का कहना है कि तकनीकी और नेटवर्क संबंधी दिक्कतों के बीच समय-सीमा में बार-बार बदलाव से यह चिंता बनी रहती है कि कहीं उपस्थिति प्रभावित न हो जाए। उनका कहना है कि ई-अटेंडेंस का उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है, लेकिन इसके लिए नियम स्पष्ट, स्थायी और व्यावहारिक होने चाहिए।
राज्य शिक्षक संघ जबलपुर के जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर शिक्षकों को लगातार मानसिक दबाव में रखना उचित नहीं है। विभाग को ई-अटेंडेंस की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि शिक्षक तनावमुक्त होकर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।
अब 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की भी ऑनलाइन हाजिरी

सरकारी स्कूलों में अब कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की ई-अटेंडेंस एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर दर्ज होगी।
शिक्षकों को पोर्टल पर अपनी कक्षा के विद्यार्थियों की सूची दिखाई देगी। प्रत्येक विद्यार्थी की उपस्थिति के लिए तीन विकल्प होंगे—उपस्थित, अनुपस्थित और अवकाश। शिक्षक संबंधित विद्यार्थी की स्थिति के अनुसार विकल्प चुनकर जानकारी सेव करेंगे।
विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति का नियमित रिकॉर्ड उपलब्ध होगा और स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। कई बार विद्यार्थी प्रवेश या अन्य औपचारिक कार्यों के समय स्कूल आते हैं और नियमित कक्षाओं से दूर रहते हैं। ऑनलाइन उपस्थिति से ऐसी स्थिति पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है।
