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DB । सेवानिवृत्त कर्मचारी के पक्ष में पहले ही निरस्त हो चुका था वसूली आदेश, सुप्रीम कोर्ट से भी राज्य की एसएलपी खारिज ।
जबलपुर। सेवानिवृत्ति के बाद जारी किए गए 23 लाख 93 हजार 830 रुपये की वसूली आदेश को हाई कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के बावजूद आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए जबलपुर हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। मामले में हाई कोर्ट ने 15 सितंबर 2026 को प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार सागर निवासी याचिकाकर्ता 31 मई 2020 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के करीब एक माह बाद 26 जून 2020 को संबंधित विभाग ने उनके खिलाफ 23,93,830 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया। इसके साथ ही पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में भी देरी हुई।
वसूली आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने फुल बेंच के निर्णय के आधार पर वसूली आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि यदि वसूली की राशि ली जा चुकी है तो उसे 30 दिन के भीतर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस किया जाए।

सेवानिवृत्ति देयकों पर भी ब्याज का आदेश
कोर्ट ने सेवानिवृत्ति देयकों का भी 30 दिन के भीतर निपटारा करने के निर्देश दिए थे। साथ ही 1 जुलाई 2020 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने को कहा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद विभाग ने करीब दो वर्ष तक मामले का निराकरण नहीं किया।
बाद में वर्ष 2026 में राज्य सरकार की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई। 6 जुलाई 2026 को विलंब माफी आवेदन स्वीकार होने के बाद 14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी मेरिट पर खारिज कर दी।
पति के निधन के बाद विधिक उत्तराधिकारी बनने की मांग
इसी बीच 22 अप्रैल 2026 को याचिकाकर्ता के पति रमेश कुमार शर्मा का निधन हो गया। याचिकाकर्ता ने स्वयं को उनकी वैध पत्नी बताते हुए मामले में विधिक उत्तराधिकारी के रूप में पक्षकार बनाए जाने की मांग की है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने अवमानना प्रकरण में प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले में संबंधित पक्षों से न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर जवाब मांगा जाएगा।
