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DB ।जबलपुर। सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और पर्याप्त शिक्षकीय व्यवस्था के दावों के बीच नुनसर के एक सरकारी स्कूल की स्थिति ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर एक शिक्षिका पढ़ाती मिलीं, जबकि स्कूल में पदस्थ तीन शिक्षकों में से दो अपनी नियमित कक्षा में मौजूद नहीं थे।
मामला मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला उजरोड़, नुनसर पाटन के निरीक्षण के दौरान सामने आया। निरीक्षण के समय अधिकारियों ने देखा कि अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाया गया था और एक शिक्षिका सभी बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

पूछताछ में सामने आया कि स्कूल की तीन शिक्षकों की व्यवस्था में से एक शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि दूसरे शिक्षक की ड्यूटी साक्षरता अभियान में लगाई गई है। इसके चलते स्कूल में मौजूद एक शिक्षिका पर तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई का भार आ गया।
लंबे समय से बनी थी स्थिति
निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की कमी को लेकर जानकारी ली गई तो पता चला कि यह स्थिति कुछ दिनों से नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने स्कूल की शिक्षण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।
साक्षरता अभियान के साथ स्कूल की जिम्मेदारी भी
मामले में प्राथमिक शिक्षक एवं माध्यमिक शिक्षक के उच्च पद का प्रभार संभाल रहे भास्कर गुप्ता को निर्देश दिए गए हैं कि साक्षरता मिशन से जुड़े कार्यों के साथ मूल विद्यालय के शैक्षणिक दायित्व का भी समुचित निर्वहन सुनिश्चित करें।
निर्देश के अनुसार संबंधित शिक्षक सप्ताह में दो दिन साक्षरता अभियान के कार्य में रहेंगे, जबकि चार दिन मूल विद्यालय में उपस्थित रहकर विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में विद्यालयीन कार्य प्रभावित होने या शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षक और संस्था प्रभारी की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि नए निर्देशों के बाद स्कूल में तीन कक्षाओं की पढ़ाई के लिए पर्याप्त और नियमित शिक्षकीय व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।
