जबलपुर। जबलपुर के मास्टर प्लान 2047 के प्रकाशन में हो रही देरी को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश के बावजूद मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं किए जाने पर नगर तथा ग्राम निवेश (TCP) विभाग के आयुक्त एवं संचालक कौशलेंद्र विक्रम सिंह को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 सितंबर 2026 को होगी।
यह कार्रवाई जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने क्रेडाई जबलपुर बिल्डर्स एसोसिएशन से जुड़े दीपक अग्रवाल की ओर से दायर अवमानना याचिका (Contempt Case No. 5799/2026) पर सुनवाई के दौरान की।

8 सप्ताह में निर्णय के आदेश के बाद भी देरी
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को संबंधित आवेदन पर 8 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इस आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को 18 मई 2026 को उपलब्ध करा दी गई थी।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद जबलपुर मास्टर प्लान 2047 का राजपत्र में प्रकाशन नहीं कराया गया। इसी को लेकर अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई।
शहर के भविष्य के लिए क्यों अहम है मास्टर प्लान?
मास्टर प्लान 2047 जबलपुर के आगामी वर्षों के नियोजित विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें शहर के आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों, सड़कों, परिवहन व्यवस्था, सार्वजनिक सुविधाओं और भविष्य के शहरी विस्तार की दिशा तय होती है।
इसके प्रकाशन में देरी से जमीन मालिकों, बिल्डरों और आम नागरिकों के बीच भूमि उपयोग और निर्माण संबंधी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद TCP विभाग को देरी की वजह और अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
