DB l पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बजट ने राज्य की राजनीति और विकास की दिशा में एक बड़ा बदलाव संकेतित किया है। पश्चिम बंगाल वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता द्वारा प्रस्तुत बजट में बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, किसानों, कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे को केंद्र में रखा गया है। सरकार ने ‘भरोसा’ योजना के तहत बेरोजगार स्नातकों को 3,000 रुपये और अन्य पात्र बेरोजगारों को 2,000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की है, जिससे युवाओं को आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है।
बजट की सबसे बड़ी घोषणा ‘अन्नपूर्णा योजना’ रही, जिसके लिए 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 20 प्रतिशत वृद्धि और एक लाख रिक्त पदों को भरने की घोषणा भी की गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत के लिए 3,100 करोड़ रुपये तथा शिक्षा के क्षेत्र में नए विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है।

बुनियादी ढांचे के विकास पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। नए पुलों, मेट्रो परियोजनाओं, हवाई अड्डों और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उत्तर बंगाल में आईआईटी और आईआईएम की स्थापना तथा कृत्रिम मेधा (एआई) मिशन शुरू करने की योजना राज्य को नई तकनीकी दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है।
हालांकि इस बजट का सबसे चर्चित पहलू अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा के बजट में की गई भारी कटौती है। भाजपा सरकार ने इसे विकास आधारित और सार्वभौमिक कल्याण की नीति बताया है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के रूप में देख रहा है।
कुल मिलाकर यह बजट संकेत देता है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ सरकार की प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। अब फोकस समुदाय आधारित राजनीति से हटकर रोजगार, बुनियादी ढांचे, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास पर केंद्रित दिखाई देता है।
