DB l पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कारोबार के दौरान लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) का भंडार पहले से ही जमा कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों के पास अगस्त 2026 तक की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है, जबकि एलपीजी की आपूर्ति कम से कम जुलाई के मध्य तक सुरक्षित मानी जा रही है। हाल के दिनों में भारतीय कंपनियों ने यूएई की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय सप्लायरों से खरीद बढ़ाई है, जिससे संभावित आपूर्ति बाधाओं का असर कम किया जा सके।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत की रिफाइनरियां शिप-टू-शिप ट्रांसफर के माध्यम से ADNOC से कच्चा तेल और एलपीजी कार्गो प्राप्त कर रही हैं। अधिकांश एलपीजी कार्गो ओमान के सोहार बंदरगाह से मंगाए गए हैं।

सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने अगस्त डिलीवरी के लिए यूएई से 40 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इसके अलावा कंपनी ने ब्राजील और पश्चिम अफ्रीका से भी 20 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की है। वहीं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने भी स्पॉट टेंडर के माध्यम से अतिरिक्त तेल खरीद सुनिश्चित की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की अग्रिम योजना और विविध स्रोतों से खरीद की रणनीति के कारण मध्य पूर्व में जारी तनाव का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। देश की ईंधन आपूर्ति व्यवस्था सामान्य और सुरक्षित बनी हुई है।
