DB l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 10 जून 2026 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर लगातार 4399 दिन पूरे किए और इस उपलब्धि के साथ देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर देश और विदेश से प्रधानमंत्री मोदी को बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्हें शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि नरेंद्र मोदी का भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने हाल ही में रोम में हुई मुलाकात और भारत-इटली के बीच शुरू हुई नई “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का भी उल्लेख किया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित गुफा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए किसी प्रधानमंत्री का इतने लंबे समय तक लगातार पद पर बने रहना भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने मोदी के नेतृत्व को सुशासन, विकास और मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक बताया।
ऑल इंडिया मुस्लिम विमेंस पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने भी प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा कि जनता का लगातार विश्वास मिलना किसी भी नेता की सबसे बड़ी सफलता होती है। उन्होंने विपक्ष को भी इस उपलब्धि के पीछे के कारणों पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी।
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने एक लेख में प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक यात्रा, नेतृत्व क्षमता और आत्मचिंतनशील व्यक्तित्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में, जब मतदाता अधिक जागरूक और अपेक्षाओं से भरा हुआ है, लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनना और जनता का विश्वास बनाए रखना असाधारण उपलब्धि है। देवेगौड़ा ने इसे भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और जीवंतता का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि को केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि बदलते भारत में जनता के निरंतर विश्वास और लोकतांत्रिक शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण मील के पत्थरों में दर्ज की जाएगी।
