DB l नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। वेतन वृद्धि, डीए और ओवरटाइम भुगतान की मांग को लेकर शुरू हुआ विरोध अब बड़े आंदोलन में बदल गया है। नोएडा के सेक्टर-63 समेत कई इलाकों में हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए, जिसके चलते हालात तनावपूर्ण हो गए।
प्रशासन का दावा है कि इस आंदोलन के पीछे बाहरी और संदिग्ध तत्वों का हाथ हो सकता है, वहीं मजदूर इसे अपनी मजबूरी और आर्थिक दबाव का परिणाम बता रहे हैं। हिरासत में लिए गए एक मजदूर के भाई ने बताया कि महज 10 रुपये की मजदूरी बढ़ोतरी से नाराज होकर मजदूरों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया था, जो बाद में उग्र हो गया।

मजदूरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच 500–550 रुपये की दिहाड़ी में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। किराया, गैस, यातायात और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि वेतन में मामूली बढ़ोतरी हो रही है। उनका सवाल है—“क्या मजदूर इंसान नहीं है, उसे गुस्सा नहीं आ सकता?”
स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। पुलिस पर पथराव किया गया और कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।
प्रशासन ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया है। पीएसी और आरएएफ की कई कंपनियां तैनात हैं, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए लोगों को भड़काने की कोशिश की गई, जिसके तहत कई संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान की गई है।

इधर, उत्तर प्रदेश शासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम वेतन में 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो 1 अप्रैल से लागू मानी जाएगी।
इस बीच राहुल गाँधी ने इस घटना को “श्रमिकों की आखिरी चीख” बताया है। फिलहाल, इलाके में शांति बनाए रखने की कोशिश जारी है, लेकिन यह मामला मजदूरों की स्थिति और औद्योगिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
