DB l उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। नए आंकड़ों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जिससे खासतौर पर बीजेपी की चिंता बढ़ती नजर आ रही है, जबकि समाजवादी पार्टी भी सतर्क हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के प्रभाव वाले शहरी जिलों—लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर और मेरठ—में 18 से 23 फीसदी तक वोटरों की संख्या घटी है। कई विधानसभा सीटों जैसे साहिबाबाद, नोएडा, लखनऊ उत्तर और आगरा कैंट में लाखों वोट कम हुए हैं, जो पहले बीजेपी के मजबूत गढ़ माने जाते थे।

वहीं मुस्लिम बहुल जिलों—मुरादाबाद, सहारनपुर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर—में वोट कटौती अपेक्षाकृत कम रही है, जो औसतन 10 से 12 फीसदी के बीच है। इससे सियासी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 13.24 प्रतिशत वोट कम हुए हैं और करीब 2 करोड़ से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं। 16 सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट घटे हैं, जिनमें से 15 सीटें बीजेपी के कब्जे में थीं।
सबसे ज्यादा असर शहरी क्षेत्रों में देखने को मिला है, जबकि ग्रामीण इलाकों में गिरावट कम रही। इस बदलाव के बाद राजनीतिक दल नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।
