0 0
Read Time:3 Minute, 39 Second

DB l मुंबई के 2006 सीरियल ट्रेन ब्लास्ट मामले में नौ साल जेल में बिताने वाले और बाद में बरी किए गए डॉ. वाहिद दीन मोहम्मद शेख ने अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से 9 करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा है। शेख का कहना है कि उनकी जवानी के अहम साल, परिवार की खुशियां और सामाजिक सम्मान सब छिन गया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सात धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इस आतंकी हमले में 180 से अधिक लोगों की मौत हुई और 800 से ज्यादा लोग घायल हुए। महाराष्ट्र पुलिस के एटीएस ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें डॉ. वाहिद शेख भी शामिल थे। उन पर मकोका के तहत आरोप लगाए गए और उन्हें 9 साल जेल में रहना पड़ा। 2015 में विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में शेख को बरी कर दिया।

अब 46 वर्षीय डॉ. शेख का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि न्याय और स्वीकार्यता की है। उन्होंने NHRC के अलावा महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से भी अपील की है। शेख का आरोप है कि उन्हें हिरासत के दौरान टॉर्चर किया गया, जिससे उन्हें ग्लूकोमा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो गईं। इस दौरान उनके पिता का निधन हो गया, मां का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया और उनकी पत्नी को बच्चों की परवरिश अकेले करनी पड़ी।

शेख ने कहा, “मेरे बच्चे ‘आतंकवादी के बच्चे’ कहे जाने के कलंक के साथ बड़े हुए। परिवार को सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। आज भी मैं लगभग 30 लाख रुपये के कर्ज में हूं।” उन्होंने बताया कि जेल में बिताए गए सालों ने उनका करियर और शिक्षा पूरी तरह बर्बाद कर दी। वर्तमान में वह स्कूल शिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं।

वाहिद शेख ने कहा कि उन्होंने दस साल तक मुआवज़े की मांग नहीं की थी क्योंकि उनके साथी आरोपी अभी भी सजा भुगत रहे थे। लेकिन अब जब जुलाई 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाकी 12 आरोपियों को भी बरी कर दिया है, तो उनके लिए मुआवज़े की मांग करना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा, “कोई रकम मेरी खोई हुई जवानी और परिवार का दर्द वापस नहीं ला सकती। लेकिन मुआवज़ा यह साबित करेगा कि मेरे साथ अन्याय हुआ था और यह मिसाल बनेगा कि निर्दोषों को दोबारा ऐसा न झेलना पड़े।”

अब आयोग इस अपील पर विचार करेगा। यह मामला न्याय प्रणाली, मानवाधिकार और मुआवज़े की ज़िम्मेदारी पर एक गंभीर बहस को जन्म देता है।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %