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DB । जबलपुर। गौरीघाट शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में तीन विषयों में 18 सीटों को मंजूरी, नवंबर से कक्षाएं शुरू होने की प्रस्तावित तैयारी…
शहर के आयुर्वेद शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। गौरीघाट स्थित 54 साल पुराने शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में अब पहली बार स्नातकोत्तर यानी एमडी की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम्स ऑफ मेडिसिन (NCISM) ने कॉलेज में तीन विषयों में कुल 18 पीजी सीटों को मान्यता दी है। इससे जबलपुर में आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
तीन विषयों में 18 सीटें
कॉलेज में एमडी की पढ़ाई संहिता सिद्धांत, रचना शरीर और द्रव्य गुण विषयों में शुरू होगी। प्रत्येक विषय में छह-छह सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रवेश अखिल भारतीय आयुर्वेद पीजी प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर होगा। इसके चलते देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी जबलपुर आकर आयुर्वेद में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

आठ साल से चल रहे थे प्रयास
वर्ष 1971 में स्थापित इस कॉलेज में अब तक केवल बीएएमएस की 60 यूजी सीटों पर ही पढ़ाई होती थी। पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए पिछले करीब आठ वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे। कॉलेज में प्रोफेसरों की कमी, अस्पताल में आवश्यक बेड, लैब सहित अन्य सुविधाओं की कमी के कारण पूर्व में निरीक्षण के दौरान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।
चार करोड़ के काम और नई नियुक्तियों से बदली स्थिति
पीजी मान्यता की तैयारियों के तहत कॉलेज में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से पंचकर्म विभाग और लाइब्रेरी को अपग्रेड किया गया। इसके साथ ही सात नए प्रोफेसरों की नियुक्ति भी की गई। आवश्यक संसाधनों और शैक्षणिक स्टाफ की उपलब्धता के बाद अगस्त में एनसीआइएसएम की टीम ने कॉलेज का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद तीन विषयों में पीजी सीटों की मान्यता का रास्ता साफ हुआ।
अक्टूबर में काउंसलिंग, नवंबर से कक्षाएं प्रस्तावित
प्रस्तावित योजना के अनुसार अक्टूबर में पीजी प्रवेश के लिए काउंसलिंग होगी और नवंबर से कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं। पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने से कॉलेज में शोध, विशेषज्ञता और आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
