file photo
DB । जबलपुर। मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर और बिजली वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद बिजली वितरण हानि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता एवं अधिवक्ता राजेंद्र अग्रवाल ने दावा किया है कि दिसंबर 2022 में करीब 1.30 करोड़ स्मार्ट मीटर और वितरण नेटवर्क के विकास के लिए 26 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी।
अग्रवाल के अनुसार, योजना का उद्देश्य बिजली चोरी और तकनीकी-वाणिज्यिक हानि को कम कर इसे करीब 12 प्रतिशत के स्तर तक लाना था। उनका सवाल है कि यदि अप्रैल 2027 से हानि का स्तर 24.5 प्रतिशत निर्धारित करने का प्रस्ताव है, तो इसके पीछे कौन से तकनीकी और वित्तीय आंकड़े हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा में भी स्मार्ट मीटर, लाइन लॉस कम करने और बिलिंग-वसूली व्यवस्था में सुधार पर खर्च तथा उसके परिणामों से संबंधित जानकारी मांगी जा चुकी है। सरकार ने बताया है कि वितरण कंपनियां आरडीएसएस के तहत प्रणाली सुदृढ़ीकरण, फीडर एवं ट्रांसफॉर्मर मीटरिंग, फीडर पृथक्करण और स्मार्ट मीटरिंग जैसे कार्य कर रही हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार, देशभर में स्मार्ट मीटरिंग के साथ विभिन्न सुधार उपायों के परिणामस्वरूप एटीएंडसी हानि वित्त वर्ष 2021 के 21.91 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 15.04 प्रतिशत हुई है। ऐसे में मध्यप्रदेश के प्रस्तावित आंकड़ों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि स्मार्ट मीटरिंग से कितनी बिजली चोरी पकड़ी गई, वितरण हानि में कितना सुधार हुआ और अब 24.5 प्रतिशत का लक्ष्य किस आधार पर तय किया गया है। अग्रवाल ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
