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DB l जबलपुर। मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और व्यवस्थाओं को लेकर चल रहे मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदेश में कुछ ऐसे नर्सिंग कॉलेजों को भी मान्यता दी गई, जहां निर्धारित मानकों और जरूरी आधारभूत सुविधाओं की कमी है। कोर्ट ने इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया, बल्कि मध्यप्रदेश नर्सिंग नियामक परिषद से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

सुनवाई में सवाल उठाया गया कि यदि किसी कॉलेज में आवश्यक भवन, प्रयोगशाला, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो उसे मान्यता किस आधार पर दी गई। कॉलेजों के वास्तविक स्थान और मान्यता आवेदनों में दर्ज जानकारी को लेकर भी सवाल उठाए गए।
यह मामला वर्ष 2022 से लंबित डब्ल्यूपी-1080/2022 से जुड़ा है। इस प्रकरण में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, विद्यार्थियों की शिक्षा और प्रशिक्षण सहित विभिन्न मुद्दों पर हाईकोर्ट में सुनवाई होती रही है। पूर्व की जांचों में कुछ कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और फैकल्टी की डुप्लीकेसी जैसी अनियमितताओं का उल्लेख भी न्यायिक आदेशों में हुआ है।

सुनवाई के दौरान ऐसे विद्यार्थियों के प्रशिक्षण का मुद्दा भी सामने आया, जिन्हें कम सुविधाओं वाले कॉलेजों से अन्य योग्य संस्थानों में स्थानांतरित किया गया है। विद्यार्थियों की सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ प्रयोगात्मक और क्लिनिकल प्रशिक्षण पूरा कराने के लिए विशेष व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने को कहा है। मामले में परिषद से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
