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विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अपनी फिल्मी करियर और बिजनेस में कदम रखने के अनुभवों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में अवसरों की कमी और वहां की इनसिक्योरिटी ने उन्हें नए रास्ते तलाशने पर मजबूर कर दिया। विवेक ने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि यहां कई बार टैलेंट और मेहनत के बावजूद आपको उतने मौके नहीं मिलते, जितने मिलने चाहिए।

फिल्म इंडस्ट्री के भीतर पनपने वाली राजनीति और इनसिक्योर माहौल ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि वह अपनी जिंदगी और करियर को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। इस कारण उन्होंने बिजनेस में कदम रखा और अलग-अलग सेक्टर्स में अपने प्रोजेक्ट्स शुरू किए।

विवेक का कहना है कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि वह खुद को एक फिक्स फ्रेम में नहीं रखना चाहते थे। वह नए-नए अवसरों को तलाशने और खुद को साबित करने के लिए तैयार थे। उनका मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में टिके रहना एक चैलेंज है, लेकिन उन्होंने इससे कुछ नया सीखते हुए अपनी जिंदगी के लिए बेहतर विकल्प चुने।
विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी फिल्मी यात्रा के संघर्ष और इंडस्ट्री की असुरक्षा पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड जैसी ग्लैमरस दिखने वाली जगह के भीतर असुरक्षा का माहौल कितना हावी हो सकता है।

हिट फिल्में देने के बावजूद बेरोजगारी का सामना
विवेक ने उल्लेख किया कि उनकी सुपरहिट फिल्म ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ के बाद भी उन्हें करीब डेढ़ साल तक कोई काम नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ऐसा दौर बहुत तनावपूर्ण और थकाने वाला था। इंडस्ट्री में हिट फिल्म देने के बाद भी बेरोजगार रहना उनकी सबसे कठिन चुनौतियों में से एक था।

फिल्म इंडस्ट्री की हकीकत
विवेक ने इंडस्ट्री को “असुरक्षित जगह” कहा। उन्होंने बताया कि यहां सिर्फ टैलेंट और मेहनत से सफलता हासिल करना मुश्किल है। दूसरी चीजें, जैसे राजनीति और व्यक्तिगत समीकरण, कलाकार के करियर पर बड़ा असर डालती हैं। विवेक के मुताबिक, “यहां आप पुरस्कार जीत सकते हैं, बेहतरीन काम कर सकते हैं, लेकिन फिर भी बेरोजगारी झेलनी पड़ सकती है।”

तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
विवेक ने साझा किया कि इस अस्थिरता और असुरक्षा के चलते उन पर मानसिक और शारीरिक रूप से गहरा असर पड़ा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक ऐसा माहौल झेलने के कारण वे थकावट और तनाव महसूस करने लगे।

नया रास्ता चुनने की प्रेरणा
इन अनुभवों ने विवेक को फिल्म इंडस्ट्री के बाहर अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बिजनेस में कदम रखा और खुद को एक नई दिशा में आगे बढ़ाया।
उम्मीदें टूटीं, लेकिन मिला नया रास्ता
विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में अपने करियर के एक चुनौतीपूर्ण दौर के बारे में बात की, जब ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ जैसी हिट फिल्म और ‘गणपत’ गाने की सफलता के बावजूद उन्हें लंबे समय तक काम नहीं मिला। 2007 में बड़ी सफलता के बाद, उन्हें उम्मीद थी कि इंडस्ट्री में उनके लिए नए दरवाजे खुलेंगे। लेकिन इसके विपरीत, उन्होंने करीब 15 महीनों तक बेरोजगारी का सामना किया।

आर्थिक स्वतंत्रता के लिए लिया बड़ा फैसला
2009 में विवेक ने एक अहम फैसला लिया। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय आर्थिक स्वतंत्रता पर फोकस किया। उन्होंने व्यवसाय में कदम रखा और इसे अपने करियर का ‘प्लान बी’ बनाया। इस फैसले ने उन्हें न केवल आर्थिक स्थिरता दी बल्कि इंडस्ट्री की असुरक्षाओं से भी आजादी दिलाई।

विवेक ने कहा, “सिनेमा हमेशा मेरा जुनून रहेगा, लेकिन व्यवसाय ने मुझे वह स्वतंत्रता दी जिसकी मुझे जरूरत थी।” यह कदम उन्हें अपनी जिंदगी पर बेहतर नियंत्रण रखने में मददगार साबित हुआ।

वर्तमान और आगे की योजनाएं
विवेक अब अपनी नई पारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने चार नई फिल्मों के लिए साइन किया है, जिनमें से एक ‘मस्ती 4’ भी है। इसके अलावा, उनका व्यवसाय उन्हें नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
विवेक की यह कहानी न केवल बॉलीवुड की सच्चाई को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि असफलता और असुरक्षा के बावजूद नई शुरुआत करना संभव है।

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