DB । राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रदेश में सातों दिन कारोबार का रास्ता साफ, लेकिन जबलपुर में पुलिस बल, ट्रैफिक, पार्किंग और सुरक्षा इंतजाम सबसे बड़ी चुनौती।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में अब होटल, रेस्टोरेंट, मॉल, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान निर्धारित नियम-शर्तों के तहत सातों दिन और 24 घंटे संचालित हो सकेंगे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता 2026’ को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को विस्तार मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
हालांकि जबलपुर में इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने से पहले प्रशासन को कई स्तरों पर तैयारी करनी होगी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार संहिता की नियम-कंडिकाओं का अध्ययन करने के बाद ही शहर में 24 घंटे कारोबार के लिए स्थल, सुरक्षा और संचालन की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
रात का कारोबार बढ़ेगा तो सुरक्षा भी बढ़ानी होगी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती रात के समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होगी। प्रशासन को यह तय करना होगा कि किन क्षेत्रों में प्रतिष्ठानों को रातभर संचालन की अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही पुलिस बल की उपलब्धता, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, अग्निसुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत योजना बनानी होगी।
नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पहले नई संहिता के नियमों और शर्तों का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभागों के बीच समन्वय कर निरीक्षण, स्थल चयन, सुरक्षा व्यवस्था और व्यापारियों से संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

व्यापारियों में उत्साह, रोजगार बढ़ने की उम्मीद
सरकार के फैसले से शहर के होटल संचालक, रेस्टोरेंट व्यवसायी, मॉल संचालक और अन्य व्यापारियों में उत्साह है। कारोबारियों का कहना है कि 24 घंटे प्रतिष्ठान खुलने से देर रात आने-जाने वाले यात्रियों, बाहर से आने वाले लोगों और रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी।
व्यापारियों का मानना है कि बाजार अधिक समय तक सक्रिय रहने से बिक्री बढ़ेगी और शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। हालांकि उनका कहना है कि व्यवस्था लागू करने के लिए प्रशासन को सुरक्षा, पार्किंग और यातायात से जुड़ी सुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा।
तीन शिफ्ट में काम, 48 घंटे की साप्ताहिक सीमा
नई व्यवस्था में कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए काम के घंटे और ओवरटाइम से जुड़े प्रावधान भी महत्वपूर्ण होंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार—
- प्रतिष्ठान सातों दिन और 24 घंटे संचालित हो सकेंगे।
- कर्मचारियों के लिए तीन शिफ्टों में काम की व्यवस्था की जा सकती है।
- किसी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा।
- निर्धारित नियमों के अनुसार ओवरटाइम का भुगतान करना होगा।
- लंबे समय तक बाजार सक्रिय रहने से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
जबलपुर में नाइट मार्केट का प्रयोग पहले भी हो चुका है
जबलपुर में रात के समय बाजार और खानपान क्षेत्र विकसित करने के प्रयास पहले भी किए जा चुके हैं। वर्ष 2019 में तैयब अली चौक के पास नाइट चौपाटी शुरू करने की योजना बनाई गई थी। तत्कालीन उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनय सक्सेना ने भी इस संबंध में पत्राचार किया था।
योजना के तहत रात में चौपाटी संचालित करने के लिए नियम-कायदे तय किए गए थे। पार्किंग की ऐसी व्यवस्था रखने पर जोर दिया गया था, जिससे यातायात प्रभावित न हो। इसके बाद करीब चार संचालकों ने रुचि दिखाई और नगर निगम से स्टॉल लगाने की अनुमति भी ली।
समय के साथ यहां स्टॉलों की संख्या बढ़कर 12 से अधिक हो गई। लेकिन स्टॉल बढ़ने के कारण यातायात बाधित होने लगा और व्यवस्था को बंद करना पड़ा।
24 घंटे बाजार के साथ ट्रैफिक सबसे बड़ी परीक्षा
नई संहिता ने भले ही 24 घंटे कारोबार का रास्ता खोल दिया हो, लेकिन जबलपुर में इसे सफल बनाने के लिए रात के बाजार की पूरी कार्यप्रणाली तय करना जरूरी होगा। कौन से बाजार या क्षेत्र रातभर खुले रहेंगे, वहां पार्किंग कहां होगी, पुलिस गश्त कितनी बढ़ेगी और अग्नि एवं आपातकालीन सेवाएं कैसे उपलब्ध रहेंगी—इन सभी सवालों के जवाब प्रशासन को तैयार करने होंगे।
व्यापार को 24 घंटे की आजादी मिल गई है, अब जबलपुर की असली परीक्षा यह होगी कि रात का बाजार चले भी और शहर की नींद, सुरक्षा व यातायात व्यवस्था भी न बिगड़े।
