DB । जबलपुर। घी-पनीर और खोवा की गुणवत्ता पर खाद्य सुरक्षा विभाग की नजर; छह नमूने जांच के लिए भेजे, धन्वंतरि नगर से 12 हजार रुपये का घी जब्त…
बाजार में किसी खाद्य पदार्थ को अक्सर सीधे ‘नकली’ या ‘मिलावटी’ कह दिया जाता है, लेकिन खाद्य सुरक्षा के नियमों के अनुसार हर घटिया या मानक से कम उत्पाद को नकली कहना सही नहीं है। खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा के आधार पर उसे अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है। इसी को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने उपभोक्ताओं को जागरूक करते हुए घी, पनीर और खोवा की जांच से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी है।
घी की जांच के बीच खाद्य सुरक्षा अभियान तेज
घी में मिलावट और गुणवत्ता को लेकर प्रदेशभर में जांच अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत विशेष रूप से पैक किए गए घी के नमूने लिए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाजार में बिक रहा उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता और संरचना के मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं।
कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देश पर जबलपुर में भी मिलावटी और दूषित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए कार्रवाई जारी है।

पनीर में भी समझना होगा फर्क
होटल और रेस्टोरेंट में पनीर से बने व्यंजनों की मांग लगातार बनी रहती है। इसकी कीमत अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण पनीर में मिलावट या गुणवत्ताहीन उत्पाद को लेकर शिकायतें भी सामने आती हैं।
बाजार में दूध से तैयार पनीर के अलावा एनालॉग पनीर जैसे उत्पाद भी उपलब्ध होते हैं। इनमें दूध के साथ या उसके स्थान पर अन्य वसा और प्रोटीन स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदते समय उसका नाम, सामग्री और लेबल पर दी गई जानकारी ध्यान से पढ़नी चाहिए।
घरेलू परीक्षण सिर्फ प्रारंभिक संकेत
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अनुसार पनीर को दबाने पर उसकी बनावट और टूटने के तरीके से उपभोक्ता को मोटे तौर पर अंतर का अंदाजा हो सकता है। हालांकि, घरेलू परीक्षण को प्रयोगशाला जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता।
किसी उत्पाद को केवल रंग, स्वाद या बनावट के आधार पर नकली घोषित करना उचित नहीं है।
नकली के बजाय ये तीन श्रेणियां समझें
1. सब-स्टैंडर्ड: उत्पाद सुरक्षित हो सकता है, लेकिन निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता।
2. मिसब्रांडेड: उत्पाद की लेबलिंग, नाम, दावे या पैकिंग निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है।
3. अनसेफ: ऐसा खाद्य उत्पाद जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक या असुरक्षित पाया जाता है।
फैट की गुणवत्ता और लेबलिंग भी महत्वपूर्ण
खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली वसा अलग-अलग स्रोतों से आ सकती है। दूध से प्राप्त वसा के अलावा निर्धारित नियमों के तहत वनस्पति स्रोतों से मिलने वाली वसा का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसलिए उपभोक्ता को केवल यह देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए कि किसी उत्पाद में वनस्पति वसा का इस्तेमाल हुआ है। लेबल पर दी गई सामग्री, उत्पाद का नाम और आवश्यक विवरण देखना अधिक महत्वपूर्ण है।
त्योहार सीजन में खोवा पर भी निगरानी
त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ खाद्य सुरक्षा विभाग ने खोवा की जांच पर भी फोकस बढ़ाया है। इस दौरान खोवा की मांग और खपत बढ़ जाती है। विभाग की टीमें बाजार से खोवा के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कर रही हैं।
उपभोक्ता रखें इन बातों का ध्यान
- पैक खाद्य उत्पाद खरीदने से पहले लेबल जरूर पढ़ें।
- निर्माण और अंतिम उपयोग की तारीख जांचें।
- फूली, क्षतिग्रस्त या संदिग्ध पैकिंग वाला उत्पाद न खरीदें।
- खुले पनीर, घी और खोवा की गुणवत्ता को लेकर विशेष सावधानी बरतें।
- केवल रंग, स्वाद या घरेलू परीक्षण के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को नकली न मानें।
- संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग के पोर्टल पर शिकायत करें।
