DB l पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बन गई है। गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मुलाकात के दौरान ऐसा बयान सामने आया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया।
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने अमेरिका को “डिक्लाइनिंग नेशन” यानी गिरता हुआ देश बताया। इस टिप्पणी को ट्रंप के सामने अमेरिका की खुली आलोचना माना जा रहा है। हालांकि बाद में ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा कि जिनपिंग का इशारा उनके कार्यकाल की ओर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden के प्रशासन की ओर था।
चीन पहुंचते ही बदले ट्रंप के सुर
चीन दौरे के दौरान ट्रंप का रुख पहले से काफी बदला हुआ नजर आया। जहां अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापार, तकनीक और वैश्विक प्रभाव को लेकर टकराव रहा है, वहीं इस बार ट्रंप ने शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की। उन्होंने जिनपिंग को “महान नेता” और “अच्छा दोस्त” बताया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट और ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका चीन के साथ रिश्तों को लेकर फिलहाल नरम रणनीति अपनाता दिख रहा है। इसी वजह से ट्रंप ने सार्वजनिक मंच पर टकराव से बचने की कोशिश की।
शी जिनपिंग के बयान से बढ़ी चर्चा
हालांकि ट्रंप ने माहौल संभालने की कोशिश की, लेकिन शी जिनपिंग का “गिरता हुआ देश” वाला बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बन गया। इसे अमेरिका की वैश्विक स्थिति और आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों पर चीन की सीधी टिप्पणी माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि विश्व व्यवस्था में अमेरिका की पकड़ कमजोर हो रही है, जबकि चीन खुद को एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में पेश कर रहा है।
ईरान संकट के बीच अहम मानी जा रही मुलाकात
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण दुनिया पहले ही तनाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे वैश्विक शक्ति संतुलन के नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
